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Arjun Meghwal: मोदी सरकार का नया दलित चेहरा बनकर उभरे अर्जुनराम मेघवाल, मिली अहम भूमिका, राजस्थान को संदेश

Fri, 19 May 2023 06:26 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

मेघवाल पहली बार तब चर्चा में आए, जब साल 2014 में उन्हें लोकसभा में मुख्य सचेतक बनाया गया। इसके महज दो साल बाद उनका मोदी मंत्रिमंडल में बतौर वित्त राज्य मंत्री प्रवेश हुआ। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के पहले ही मंत्रिमंडल विस्तार में उनका कद बढ़ाकर उन्हें संसदीय कार्य, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा मंत्रालय का राज्यमंत्री बनाया गया।
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अर्जुनराम मेघवाल। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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अर्जुनराम मेघवाल मोदी सरकार और भाजपा का नया दलित चेहरा बनकर उभरे हैं। व्यक्तित्व में विनम्रता के साथ सादगी और व्यापक प्रशासनिक अनुभव के सहारे मेघवाल ने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है। देश का नया कानून मंत्री बनाकर जहां सरकार ने एक ओर न्यायपालिका से टकराव पर लगाम लगाने का संकेत दिया है, वहीं दलित बिरादरी के मेघवाल की पदोन्नति के जरिए चुनावी राज्य राजस्थान को भी अहम संदेश दिया है।

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मेघवाल को आगे बढ़ाकर भाजपा मजबूत दलित चेहरों की कमी को पूरा करना चाहती है। पार्टी अरसे से इसकी भरपाई सहयोगियों के दम पर करती रही है। पहले दिवंगत रामविलास पासवान, फिर पशुपति पारस, आरपीआई के रामदास अठावले के जरिए भाजपा इस कमी को पूरा करती रही है। इसी कड़ी में पार्टी ने चिराग पासवान को साधा है, जबकि जीतनराम मांझी पर डोरे डाल रही है।

दूसरे कार्यकाल में भी अहम भूमिका
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी उनकी भूमिका अहम बनी रही। नई सरकार में उन्हें संसदीय कार्य के साथ भारी उद्योग मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद पहले विस्तार में उन्हें संस्कृति मंत्रालय में बतौर राज्यमंत्री अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई। अब अचानक हुए फेरबदल में उन्हें कानून मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है।
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प्रशासनिक अनुभव के साथ सादगी-विनम्रता आई काम
किरेन रिजिजू के विकल्प के रूप में मेघवाल हर खांचे में फिट बैठे। उनके पास राज्य प्रशासनिक सेवा के साथ आईएएस के रूप में प्रशासनिक अनुभव है। मेघवाल सादगी पसंद और बेहद विनम्र हैं। राजनीति शास्त्र से एमए के साथ मेघवाल के पास कानून की भी डिग्री है।

साइकिल प्रेम की भी हुई चर्चा
संसद में साइकिल से पहुंचने वाले मेघवाल इकलौते सांसद थे। पहली बार जब मंत्री बनने का अवसर मिला तो शपथ ग्रहण समारोह में भी साइकिल से ही पहुंचे।

राजस्थान को संदेश
राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां दलित मतदाता करीब 16 फीसदी हैं और इनमें भी 60 फीसदी आबादी मेघवालों की है। राज्य में 17 फीसदी दलित मतदाता हैं। विधानसभा में अनुसूचित जाति की सुरक्षित सीटों पर वर्तमान में कांग्रेस को भाजपा पर बढ़त हासिल है। कांग्रेस 34 सुरक्षित सीटों में से 19 तो भाजपा 12 पर काबिज है। दलित मतदाताओं का राज्य की चार दर्जन सीटों पर खासा प्रभाव है। ऐसे में अर्जुन राम मेघवाल की पदोन्नति के जरिए भाजपा इस बिरादरी में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है।

बुनकरी की...टेलीफोन ऑपरेटर भी रहे
मेघवाल का जन्म किशमीदेसर गांव के एक पारंपरिक बुनकर परिवार में हुआ। बचपन में वह बुनकरी में अपने पिता की मदद करते थे। महज 13 साल की उम्र में शादी के बाद भी अध्ययन के लिए लालायित रहे। उन्होंने बीकानेर के राजकीय डूंगर कॉलेज से मास्टर्स और एलएलबी की डिग्री ली। पहली नौकरी डाक विभाग में टेलीफोन ऑपरेटर की मिली। फिर साल 1982 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा में उनका चयन हुआ। बाद में आईएएस अफसर के रूप में पदोन्नति हुई।

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