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Cow National Animal: गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा कब? कानून मंत्री बोले- ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

Sat, 30 May 2026 05:43 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल पीटीआई, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने साफ किया है कि फिलहाल केंद्र सरकार के पास गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने या देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि कई संगठन और धर्मगुरु लगातार इसकी मांग कर रहे हैं। मुस्लिम नेताओं के एक वर्ग ने भी इस मांग का समर्थन किया है।
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कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देशभर में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग के बीच केंद्र सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि फिलहाल केंद्र सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संगठनों और लोगों की ओर से इस तरह की मांग लगातार उठाई जाती रही है, लेकिन अभी तक यह मामला सरकार के निर्णय स्तर तक नहीं पहुंचा है।
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अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि गोहत्या से जुड़े कानून अलग-अलग राज्यों में अलग हैं और राज्य अपनी परिस्थितियों के हिसाब से फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा कि कई संगठन सांसदों और सरकार को ज्ञापन देकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और देशभर में गोहत्या पर रोक लगाने की मांग करते रहते हैं। हालांकि फिलहाल केंद्रीय कैबिनेट के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अगर भविष्य में कोई प्रस्ताव सरकार के फैसले के स्तर तक पहुंचता है तो इसकी जानकारी दी जाएगी।

क्या केंद्र सरकार के पास कोई प्रस्ताव है?
केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि अभी केंद्र सरकार या कैबिनेट के सामने गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अक्सर चर्चा में रहता है और सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर बहस होती रहती है। कई संगठन इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी सरकार ने इस पर कोई निर्णय प्रक्रिया शुरू नहीं की है। मेघवाल ने यह भी कहा कि राज्यों के अपने कानून और हालात होते हैं, इसलिए वे उसी आधार पर कदम उठाते हैं।
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राज्यों में गोहत्या को लेकर क्या स्थिति है?
मेघवाल ने कहा कि गोहत्या से जुड़े कानून पूरे देश में एक जैसे नहीं हैं। कई राज्यों में गोहत्या पर सख्त प्रतिबंध है, जबकि कुछ राज्यों में अलग नियम लागू हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार के हालिया कदम का भी जिक्र किया, जहां 1950 के कानून के तहत मवेशियों के वध नियमों को सख्ती से लागू करने की बात कही गई है। केंद्र सरकार का कहना है कि राज्यों को अपने हालात के हिसाब से फैसला लेने का अधिकार है।

मुस्लिम संगठनों ने क्या कहा?
इस मुद्दे पर सिर्फ हिंदू संगठन ही नहीं, बल्कि कई मुस्लिम संगठन और धर्मगुरु भी समर्थन में सामने आए हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और गोहत्या पर देशभर में प्रतिबंध लगाने की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इससे समाज में तनाव कम हो सकता है। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी कहा था कि अगर गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने से विवाद कम होते हैं तो इस पर विचार होना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों से गाय की कुर्बानी से बचने की अपील भी की थी।

अन्य मुस्लिम नेताओं की क्या राय?
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक विश्वासों का सम्मान होगा। ईद-उल-अजहा से पहले कई दूसरे मुस्लिम नेताओं और धर्मगुरुओं ने भी इसी तरह की अपील की थी। इसके बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।
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