देश में एक तरफ कोरोना महामारी से मरने वालों का आंकड़ा एक हजार की ओर बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ प्राकृतिक या अन्य कारणों से होने वाली मौतें कम हो रही हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल दूसरे कारणों से होने वाली मौतों का आंकड़ा कम है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक अस्पतालों, शमशानघाटों और दाह संस्कार क्रियाओं से जुटाए गए आंकड़ें बताते हैं कि गैर कोरोना मरीजों की मृत्यु दर में कमी आई है। देश में 25 मार्च से लॉकडाउन की स्थिति है, जिसकी वजह से लोगों की मृत्यु किसी दूसरे कारण से कम हो रही हैं।
मुंबई की जनसंख्या 1.2 करोड़ के करीब है। बृहंमुंबई नगर पालिका के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल मार्च महीने में होने वाली मौतों की संख्या में 21 फीसद की गिरावट देखी गई है।
वहीं गुजरात के अहमदाबाद में भी पिछले साल की तुलना में 67 प्रतिशत कम मौतें हुई हैं। इसके अलावा केरल के अस्पतालों में 30-50 फीसद तक दिल का दौरा पड़ने वाले मरीजों में गिरावट देखने को मिली है।
देश में सबसे ज्यादा मौतें सड़क और रेल दुर्घटनाओं से होती हैं। आंकड़ें बताते हैं कि विश्व में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में भारत का स्थान सबसे ऊपर आता है। 2018 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में सड़क दुर्घटना से 1,51,417 लोगों की मौतें हुई जबकि हर घंटे 17 लोगों की मौत होती है।
लॉकडाउन की वजह से सड़क पर ट्रैफिक कम हुआ जिस वजह से पिछले एक महीने में सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2020 में सड़क दुर्घटनाओं में 15 फीसद की गिरावट देखी जा सकती है।
उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे एक शमशानघाट में प्रतिदिन दुर्घटनाएं संबंधी कम से कम दस मामले आते थे और प्रतिदिन 30 दाह संस्कार किए जाते थे। अब हाल ऐसा है कि एक दिन में केवल एक से दो मामले आ रहे हैं वो भी जिनकी प्राकृतिक मौत हुई हो। उस शमशानघाट में 22 मार्च से अबतक 43 दाह संस्कार किए गए हैं।
पंजाब के अस्पतालों में ड्रग और अल्कोहल से होने वाली मौतों में कमी आई है। लॉकडाउन के दौरान पंजाब सरकार के नशामुक्ति कार्यक्रमों में 26,000 नशा करने वाले लोगों के रजिस्ट्रेशन का इजाफा हुआ है।
हालांकि लॉकडाउन के दौरान दाह संस्कार जैसी क्रियाओं के लिए प्रशासन से अनुमति मिली हुई है लेकिन 20 से ज्यादा लोगों के इकट्ठे होने पर अभी भी रोक है।