आईआईटीएम या इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियरोलॉजी (भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान) का एक अध्ययन कहता है कि यह अनुपात जल्द ही बदल सकता है। इस अध्ययन में सामने आया है कि अरब सागर में चक्रवातों की आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) और तीव्रता (इंटेंसिटी), दोनो में ही वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे का प्रमुख कारण समुद्र के तापमान में इजाफा होना है। 2019 में अरब सागर में पांच चक्रवात बने थे जबकि बंगाल की खाड़ी में तीन।
आईआईटीएम के रॉक्सी कोल ने कहा, चक्रवात बनने के लिए समुद्र का आदर्श तापमान (एसएसटी) 28.5 डिग्री सेल्सियस है। सामान्यत: 28 डिग्री सेल्सियस एसएसटी पर, बंगाल की खाड़ी को गर्म पूल क्षेत्र में रखा गया है। चक्रवात गर्म पूल क्षेत्रों से ऊर्जा लेते हैं। उन्होंने कहा, पारंपरिक रूप से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी के मुकाबले कहीं ठंडा है। लेकिन अब अरब सागर भी गर्म पूल क्षेत्र बन रहा है। ऐसा ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ़ रही अतिरिक्त गर्मी की वजह से हो रहा है।
गर्म पूल क्षेत्र होने के अतिरिक्त बंगाल की खाड़ी, अरब सागर के मुकाबले अधिक जमीन से घिरी है। दक्षिण एशियाई देश इसके इर्द-गिर्द आते हैं। इससे समुद्र के खारेपन में इजाफा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में प्रशांत महासागर से आंधी-तूफान के अवशेष आते हैं। ये यहां कम दबाव वाले क्षेत्र के रूप में आते हैं लेकिन आदर्श परिस्थितियां मिलने के कारण चक्रवात में बदल जाते हैं।