सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से 12000 करोड़ रुपए की चार धाम परियोजना के लिए 10-मीटर सड़क की चौड़ाई का समर्थन करने वाली हाई पावर्ड कमेटी के बहुमत के दृष्टिकोण को स्वीकार करने का आग्रह किया है।
मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी के 26 में से 21 सदस्य भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में सैन्य बलों की आवाजाही को सुगम बनाने और स्थानीय लोगों के लिए बेहतर सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए चौड़ी सड़कों के पक्ष में हैं।
साथ ही मंत्रालय ने इस पर भी सहमति व्यक्त की है कि कमेटी को चार धाम सड़क परियोजना की निगरानी करनी चाहिए। न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ सोमवार को इस हलफनामे पर विचार करेगी।
गत वर्ष सितम्बर में शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि 2018 में मंत्रालय की अधिसूचना को देखते हुए पूरे चार धाम मार्ग पर सड़क की चौड़ाई 5.5 मीटर से अधिक नहीं हो सकती है।
बाद में भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने इस आदेश को संशोधित करने की मांग की। रक्षा मंत्रालय ने शिकायत की कि सड़कों की चौड़ाई पर वर्ष 2012 और 2018 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सर्कुलर में सुरक्षा बलों की जरूरतों को ध्यान में नहीं रखा गया।
उसका कहना था कि इस परियोजना के अन्तगर्त चीन से जुड़ा सीमा क्षेत्र भी है। ऐसे में सेना के वाहन भी इस स?क से होकर जाएंगे, लिहाजा सड़क की चौड़ाई सात मीटर रखने की अनुमति दी जाए। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को इस संबंध में उचित सिफारिश देने के लिए कहा गया था।
गौरतलब है कि चार धाम परियोजना का मकसद पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के चार तीर्थस्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को एक-दूसरे से जोड़ना है। इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद हर मौसम में तीर्थयात्री चार धाम की यात्रा कर सकेंगे। इस परियोजना के तहत 889 किलोमीटर सटीक को चौड़ा किया जाना है। करीब 1200 करोड़ रुपए की इस परियोजना के तहत अब तक 400 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण किया जा चुका है। जानकारी के मुताबिक, अब तक 26 हजार से अधिक पेड़ों को काटा जा चुका है।