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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति: SC के फैसले पर विशेषज्ञों में मतभेद, पूर्व विधि सचिव ने पारदर्शिता पर उठाया सवाल

Thu, 02 Mar 2023 10:05 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त मनोहर गिल ने कहा, मैंने इस प्रक्रिया के बारे में तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिखा था। उन्होंने कुछ नहीं किया और अदालतों ने भी कुछ नहीं किया। आज इस पीठ ने जो किया है वह भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे अच्छी चीज है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के बारे में सुप्रीम कोर्ट फैसले को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ ने इसका स्वागत किया है, जबकि कुछ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को कार्यपालिका और विधायिका के काम में दखल देने और कानून बनाने की अनुमति नहीं दी गई है।

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पूर्व केंद्रीय विधि सचिव पीके मल्होत्रा ने कहा कि इस फैसले के जरिये यह आभास हो रहा है कि कोर्ट ने कानून बनाया है जबकि यह उसका काम नहीं है। उन्होंने कहा, वास्तव में आप ऐसे क्षेत्र में कानून बना रहे हैं जो आपका अधिकार क्षेत्र नहीं है। आप कानून की व्याख्या कर सकते हैं, संविधान की व्याख्या कर सकते हैं...ये ठीक है। आप (संविधान पीठ) कह सकते हैं कि आपने व्यापक पारदर्शिता के लिए ऐसा किया। लेकिन यही बात जजों की नियुक्ति के लिए भी कही जा सकती है कि वहां भी पारदर्शिता होनी चाहिए और वहां भी एक प्रक्रिया होनी चाहिए।

एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने नाम न छापने की शर्त पर इस फैसले को गलत बताया। उन्होंने कहा, ऐसे में जजों की नियुक्ति के पैनल का प्रमुख भी प्रधानमंत्री को होना चाहिए। वहीं, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त मनोहर सिंह गिल ने कहा, मैंने इस प्रक्रिया के बारे में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पत्र लिखा था। उन्होंने कुछ नहीं किया और अदालतों ने भी कुछ नहीं किया। आज इस पीठ ने जो किया है वह भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे अच्छी चीज है।
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उन्होंने कहा, वाजपेयी अच्छे व्यक्ति थे और बाकी के प्रधानमंत्री भी। लेकिन समय सही नहीं था। उनकी पार्टियों में दूसरी ताकतें थे और ये लोग जो कहते थे कई बार वैसा नहीं हो पाता था। जज भी उतनी दूर तक नहीं जाते थे। उन्होंने बृहस्पतिवार के फैसले का श्रेय देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को दिया। लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीपी अचारी ने भी फैसले को अच्छा बताया। उन्होंने कहा, कोर्ट ने नियुक्ति की अस्थाई व्यवस्था की है। इस प्रक्रिया में विधायिका और न्यायपालिका दोनों को शामिल किया गया है जो अच्छी बात है।

एक अन्य पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी इसे शानदार फैसला बताया। उन्होंने कहा, चुनाव आयोग 20 से अधिक वर्षों से ऐसी मांग कर रहा था। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों ने कई बार इसके लिए पत्र लिखे। मैंने खुद कई बार यह मांग उठाई कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कॉलेजियम के जरिये होनी चाहिए। 

उन्होंने आगे कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर प्रोन्नति स्वत: होनी चाहिए और पद से हटाने के मामले में जो सुरक्षा सीईसी को हासिल है वह अन्य दोनों आयुक्तों को भी मिलनी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में सीईसी को संसद के जरिये अपदस्थ किया जा सकता है जबकि शेष दोनों आयुक्तों को सीईसी की सिफारिश पर केंद्र सरकार हटा सकती है।

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