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Supreme Court: '2014 से पहले का मुआवजा न मिलने पर लागू होगा 2013 का कानून', सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Mon, 09 Feb 2026 10:51 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन अधिग्रहण मुआवजे के खिलाफ अपीलें परिसीमा कानून से बाहर नहीं होतीं और हाईकोर्ट देरी को माफ कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में 2014 से पहले मुआवजा नहीं मिला, उन्हें 2013 के नए कानून के तहत तय किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर-
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जमीन अधिग्रहण मुआवजे से जुड़ी अपीलों पर एक अहम फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि मुआवजे के खिलाफ दायर अपीलें परिसीमा कानून से अपने-आप बाहर नहीं होतीं। हाईकोर्ट ऐसी अपीलों में देरी को माफ कर सकता है।
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न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एससी शर्मा की पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ ने 2013 के जमीन अधिग्रहण कानून और 1963 के परिसीमा अधिनियम के संबंध पर विचार किया। यह मामला पुराने और नए कानून के बीच तालमेल से जुड़ा था।

कोर्ट ने कहा कि जिन जमीन अधिग्रहण मामलों में 1894 के कानून के तहत प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन एक जनवरी 2014 से पहले मुआवजे का फैसला नहीं हुआ, उन मामलों में मुआवजा 2013 के नए कानून के तहत तय होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2013 के कानून की धारा 24(1)(ए) ऐसे सभी मामलों पर लागू होगी। इस धारा के तहत मुआवजा तय करने के लिए नए कानून के प्रावधान ही मान्य होंगे। हालांकि पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े लाभ अलग रहेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़ित पक्ष 2013 के कानून के तहत बने प्राधिकरण के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। इन अपीलों को पहली अपील माना जाएगा।

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कोर्ट ने यह भी कहा कि 2013 के कानून की धारा 74 परिसीमा अधिनियम की धारा पांच को लागू होने से नहीं रोकती। इसका मतलब है कि देरी होने पर भी अपील स्वीकार की जा सकती है। पीठ ने निर्देश दिया कि देरी माफ करने के लिए दाखिल सभी अर्जियां स्वीकार मानी जाएंगी। 
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शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट को ऐसे मामलों में व्यावहारिक नजरिया अपनाना चाहिए। बेहद सख्त रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी हाईकोर्ट आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें किसानों की अपीलें समयसीमा के आधार पर खारिज कर दी गई थीं। राज्य सरकारों को भी जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया है।


 
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