फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बन सकता है सख्त कानून: सुप्रीम कोर्ट से देश में जनसंख्या विस्फोट रोकने की गुहार

Sun, 04 Jul 2021 02:39 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

केंद्र ने स्पष्ट रूप से लोगों को परिवार नियोजन के लिए मजबूर करने और बच्चों की एक निश्चित संख्या तय करने के लिए किसी तरह की जबरदस्ती का विरोध किया है।
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश में ज्यादातर समस्याओं की जड़ जनसंख्या विस्फोट है, लेकिन केंद्र ने इस खतरे को रोकने के लिए आज तक कोई सख्त कानून बनाने की दिशा में उचित कदम नहीं उठाया है। यह दलील सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार के जवाब के प्रत्युत्तर में दाखिल याचिका में दी गई। 

विज्ञापन


भाजपा नेता व अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने प्रत्युत्तर याचिका में कहा, केंद्र ने स्पष्ट रूप से लोगों को परिवार नियोजन के लिए मजबूर करने और बच्चों की एक निश्चित संख्या तय करने के लिए किसी तरह की जबरदस्ती का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रति उत्पादक और जनसांख्यिकीय विकृतियों को बढ़ावा देने वाला है। 

उपाध्याय ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस याचिका को खारिज करने वाले निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें देश की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए अधिकतम दो बच्चों के नियम समेत कुछ निश्चित कदम उठाए जाने की मांग की गई थी।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया कि जनसंख्या नियंत्रण व परिवार नियोजन संविधान में सातवीं अनुसूची (20ए) की लिस्ट-3 का हिस्सा है। इसके चलते केंद्र जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित करने के लिए कठोर कानून व नियम बना सकता है। लेकिन आज की तारीख तक कठोर कानून बनाने के लिए कोई भी उचित कदम नहीं उठाया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें