स्व. सोने लाल पटेल का अपना दल उ.प्र. में कभी बड़ा राजनीति का केंद्र नहीं बन सका। पहली बार अपना दल के दो सांसद (केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, सोने लाल की बेटी और कुंवर हरिबंश सिंह) संसद भवन में पहुंचे हैं, लेकिन दल के नखरे हजार हैं। कुंवर हरिबंश सिंह अनुप्रिया पटेल की मां के साथ हैं। उनका कहना है कि भाजपा को दल की ताकत ध्यान में रखकर करीब 20 सीटें देनी चाहिए।
हरिबंश सिंह का कहना है कि कानपुर से लेकर मिर्जापुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, इलाहाबाद, वाराणसी और उ.प्र. के कई जिलों में अपनादल का प्रभाव है। इसे ध्यान में रखकर भाजपा को कम से कम 20 सीटें देनी चाहिए। हरिबंश सिंह अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल के साथ हैं। कृष्णा पटेल स्व. सोनेलाल की विधवा हैं और उनका दावा है कि असली अपना दल का प्रतिनिधित्व वही करती हैं।
मां -बेटी में है विवाद
कृष्णा पटेल ने बेटी और सांसद तथा केन्द्र सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल को 1995 में ही पार्टी से निकाल दिया था। अनुप्रिया पटेल पार्टी की महासचिव थी। बाद में पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री ने अनुप्रिया पटेल को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बना दिया। अनुप्रिया पटेल पूरी तरह से भाजपा के साथ हैं। कुंवर हरिबंश सिंह का कहना है कि मां-बेटी को एक हो जाना चाहिए। इसी में अपना दल की भी भलाई है।
दोनों प्रत्याशी अलग चिन्ह पर लड़े चुनाव
2014 के अपना चुनाव में अपना दल को भाजपा से मिली सीटों पर चुनाव जीतकर आए दोनों सांसद अलग-अलग चुनाव चिन्ह से विजयी हुए थे। कुंवर हरिबंश सिंह को चुनाव चिन्ह कैंची मिला था। वहीं अनुप्रिया पटेल कप प्लेट चुनाव चिन्ह पर लड़ी थी। कुंवर हरिबंश सिंह का कहना है कि दरअसल पार्टी के पास कोई अधिकृत चुनाव चिन्ह नहीं था। इसलिए लोकसभा में मान्यता भी निर्दल सांसद के रूप में है।