निमहेन्स के साथ ब्रेन इंजरी/स्टडी पर शोध
बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड साइंसेज के साथ मिलकर डीआरडीओ शोध कर रहा है। इस शोध में दिमाग में चोट लगने के बाद होने वाले ब्रेन के बदलाव पर शोध किया जा रहा है। ताकि इसके शोध के बाद दवाएं बनाकर बीमारी से निजात दिलाई जा सके।
गर्मी की वजह से होने वाली बीमारियों पर शोध
भुवनेश्वर एम्स के डॉक्टरों के साथ मिलकर डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने रिसर्च शुरू की है। शोध करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन इलाकों में बहुत गर्मी पड़ती है वहां के लोगों में कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। चूंकि गर्मियों की वजह से सैनिकों को भी बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस दिशा में किये जाने वाले शोध से न सिर्फ सैनिकों बल्कि आम लोगों को भी निजात मिलेगी।
रक्त नलिकाओं की बीमारियों में एम्स के साथ मिलकर शोध
पैरों की नसों में ब्लड ब्लॉकेज होने से नसों में बहुत सूजन आ जाती है। वक्त पर इलाज न मिलने पर पैरों को काटना तक पड़ जाता है। लेकिन डीआरडीओ के वैज्ञानिक ब्लड वैसेल मार्कर तैयार कर रहे हैं। ताकि इन मार्कर के माध्यम से इसका आकलन किया जा सके कि किस वक़्त पर बीमारी का सही इलाज मिलना चाहिए। चूंकि यह बीमारी बर्फीले पहाड़ों पर तैनात सैनिकों में भी खूब होती है। ऐसे में इस मार्कर के बनने से बीमारों को बचाया जा सकेगा।
डेंगू बीमारी पर शोध
असम मेडिकल कॉलेज के साथ मिलकर डीआरडीओ के वैज्ञानिक डेंगू की बीमारी पर शोध कर रहे हैं। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि डेंगू को लेकर अभी भी कोई ऐसी दवा बाजार में नहीं है जो रामबाण के तौर पर इस्तेमाल की जा रही हो। उनका शोध इसी दिशा में है।
मोबाइल डेंगू डाइग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी
आंध्र प्रदेश यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर डीआरडीओ के वैज्ञानिक ड़ेंगू की मोबाइल जांच तकनीकी विकसित कर रहे हैं। इस तकनीक के विकसित होने से रिमोट इलाकों में डेंगू की जांच में आसानी हो जाएगी।