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AP Techie Murder: मौत की सजा पाए व्यक्ति को बरी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा; किस मामले में हुई थी सजा?

Tue, 28 Jan 2025 10:00 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Supreme Court - फोटो : PTI
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश की 23 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कथित हत्या के मामले में अभियोजन मामले में 'बड़ी खामियां' देखते हुए मौत की सजा पाए व्यक्ति को बरी कर दिया है। मामले में न्यायमूर्ति बीआर गवई, प्रशांत कुमार मिश्रा और केवी विश्वनाथन की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चंद्रभान सुदाम सनप के खिलाफ दोषसिद्धि को बरकरार रखना बेहद असुरक्षित होगा।
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ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के पास मिला था जला-सड़ा शव
एक दशक से भी अधिक समय पहले, आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम की एक 23 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर क्रिसमस की छुट्टी के बाद 5 जनवरी, 2014 को मुंबई लौटी और मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर ट्रेन से उतरी, जहां उसे आखिरी बार जीवित देखा गया था। सेलफोन पर उससे संपर्क करने के कई बार असफल प्रयासों के बाद, उसके पिता ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। करीब 10 दिनों तक चली खोजबीन के बाद, कंजुरमार्ग इलाके में ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के पास झाड़ियों में एक जला हुआ और सड़ा शव मिला।

चंद्रभान सुदाम सनप पर पुलिस ने लगाया था आरोप
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने मामले में चंद्रभान सुदाम सनप को गिरफ्तार किया और उस पर तकनीकी विशेषज्ञ के साथ बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया। उसके मुकदमे का अंत उसे मौत की सजा सुनाए जाने के साथ हुआ। बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस फैसले को दरकिनार करते हुए, जिसमें उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया था, शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन परिस्थितियों पर भरोसा किया गया, उन्हें एक साथ जोड़कर उसके दोषी होने की एकमात्र परिकल्पना नहीं बनाई जा सकती।
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'अभियोजन पक्ष की कहानी में बहुत सी खामियां हैं'
इसमें कहा गया, 'सभी तथ्य हमें यह निष्कर्ष निकालने के लिए बाध्य करते हैं कि अभियोजन पक्ष की कहानी में बहुत सी खामियां हैं, जो इस निष्कर्ष पर ले जाती हैं कि इस मामले में जो दिख रहा है, उससे कहीं अधिक कुछ है।' पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इस प्रकार, हम इस एकमात्र निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बाध्य हैं कि अपीलकर्ता उन अपराधों का दोषी नहीं है, जिनके लिए उस पर आरोप लगाया गया है।' 2015 में एक विशेष अदालत ने मुंबई की एक प्रमुख आईटी फर्म में कार्यरत महिला के बलात्कार और हत्या के लिए सनप को दोषी ठहराया और उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई। 2018 में उच्च न्यायालय ने मृत्युदंड को बरकरार रखा और कहा कि उसे सुधार की कोई संभावना नहीं दिखती।

अभियोजन पक्ष ने ये बताई थी कहानी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 जनवरी 2014 को, पीड़िता अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताने के बाद आंध्र प्रदेश में अपने मूल निवास से उपनगरीय मुंबई के रेलवे स्टेशन पर पहुंची। आरोप है कि सुबह लगभग 5 बजे, वह स्टेशन के बाहर सनप से मिली और उसने उसे 300 रुपये के बदले अपनी मोटरसाइकिल पर उपनगरीय अंधेरी में वाईडब्ल्यूसीए छात्रावास तक छोड़ने की पेशकश की, जहां वह रहती थी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि वह सहमत हो गई, लेकिन रास्ते में सनप उसे कांजुरमार्ग के पास एक सुनसान जगह पर ले गया, जहां उसने उसके साथ बलात्कार किया और उसे मार डाला। अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसने उसके शव को आंशिक रूप से जला दिया और उसे ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के पास झाड़ियों में फेंक दिया, जहां उसका शव उसी साल 14 जनवरी को उसके परिवार को मिला। हालांकि, मामले में सनप ने सभी आरोपों से इनकार किया था।
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