अकेली भाजपा मथुरा मुद्दे को उठा रही, पूरे प्रदेश में चला रही अभियान
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा
देशभर में चर्चा बने मथुरा के जवाहर बाग कांड के यूपी में चुनावी मुद्दा बनने में सियासी दोस्ती बड़ी बाधा बनेगी। यूपी में चल रही मौजूदा सियासी हलचल का इस पर साफ असर दिखा रहा है। हालात ऐसे हैं कि भाजपा को छोड़कर कोई भी राजनीतिक दल इस मामले को लेकर मुखर नहीं दिख रहा है।
मथुरा कांड में एसपी और एसओ के शहीद होने के बाद सभी राजनीतिक दल एकाएक सहानुभूति हासिल करने में जुट गए थे। लेकिन कई दलों ने संभावित सियासी दोस्ती और गठजोड़ के चलते इस कांड को लेकर अब एक तरह से नरम रुख अपनाया हुआ है। गौरतलब है कि सूबे में रालोद-सपा और कांग्रेस में चुनावी गठबंधन की बात चल रही है।
तीनों दलों का शीर्ष नेतृत्व इस बाबत मिलकर पहले दौर की बात भी कर चुके हैं। बसपा से गैर भाजपाई दलों की नजदीकी बढ़ी है। इसका असर यह दिख रहा है कि बसपा सिर्फ सीबीआई जांच की मांग कर शांत हो गई। इस मामले आंदोलन का एलान नहीं किया गया। इसी तरह कांग्रेस नेता तो सिर्फ बयानबाजी तक ही सीमित रहे।
रालोद के जयंत चौधरी मथुरा से सांसद रह चुके हैं इसलिए वह गए जरूर, लेकिन सरकार को घेरने के लिए आंदोलन के एलान से बचते दिखे। भाजपा जरूर इस मुद्दे पर मुखर है और सरकार पर हमला बोल रही हैै। भाजपा प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा का कहना है कि पार्टी इस मुद्दे पर सरकार को घेरती रहेगी।