विदेशों में नौकरी दिलाने की आड़ में भारतीयों को जबरन रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में उतारा जा रहा है। ऐसे ही लालच में आए त्रिशूर के कुछ लोग यूक्रेन के युद्धग्रस्त क्षेत्र में कहीं फंस गए हैं। सात महीने पहले इलेक्ट्रीशियन बिनिल टीबी इस उम्मीद में रूस चला गया था कि उसे बेहतर नौकरी और ज्यादा वेतन मिलेगा। जिस समय शख्स विदेश गया था, उस समय उसकी पत्नी गर्भवती थी।दुख की बात यह कि चार महीने बीत जाने के बाद भी वह अपने बेटे के जन्म की खुशी साझा नहीं कर सका है।
अधिकारियों से लगा रहीं मदद की गुहार
दरअसल, बिनिल और उनके रिश्तेदार जैन टीके की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान खो गए। रिश्तेदारों की माने तो टीबी की पत्नी अपने पति की वापसी के लिए अधिकारियों से मदद मांग रही है। त्रिशूर जिले के वडक्कनचेरी के निकट कुरांचेरी निवासी और बिनिल की पत्नी जोइसी जॉन लगातार अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रही हैं।
चार महीने के बच्चे की मां है जोइसी
चार महीने के बच्चे की मां जोइसी सोमवार को बिनिल का आखिरी ऑडियो संदेश मिलने के बाद चिंता में पड़ गई है। दरअसल, त्रिशूर के शख्स ने संदेश में बताया था कि रूसी अधिकारियों ने उन्हें और उनके चचेरे भाई जैन को युद्ध के मोर्चे पर रिपोर्ट करने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं, वह इस समय लगातार हवाई हमलों वाले क्षेत्र में हैं।
इन लोगों से मांगी सहायता
जोइसी ने राज्य सरकार, केंद्रीय मंत्री और त्रिशूर के सांसद सुरेश गोपी, राज्य के सभी अन्य सांसदों और मॉस्को में भारतीय दूतावास से अपने पति और रिश्तेदार की युद्ध क्षेत्र से जल्द रिहाई सुनिश्चित करने के लिए संपर्क किया। उन्होंने एक महीना बीतने के बाद निराशा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि दूतावास के अधिकारी लगातार कह रहे हैं कि वे रूसी अधिकारियों से कोई संदेश मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
सात महीने पहले गए थे
उन्होंने कहा कि पति बिनिल ने अंतिम संदेश में कहा था कि उन्हें युद्ध के मोर्चे पर जाने का निर्देश दिया गया है। जोइसी, जो वर्तमान में मातृत्व अवकाश पर हैं, ने कहा, 'मैं आपा खो चुकी हूं। उन्हें सात महीने हो गए हैं यहां से जाए हुए। मुझे समझ नहीं आ रहा क्या करूं।'
काम करने के लिए जाना पड़ा भारी
महिला ने कहा, '32 साल के बिनिल और 27 वर्षीय जैन आईटीआई मैकेनिकल डिप्लोमा धारक हैं और चार अप्रैल को रूस गए थे, उन्हें उम्मीद थी कि वे रूस में इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर के तौर पर काम करेंगे। हालांकि, जब वह वहां पहुंचे तो उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए। बाद में उन्हें रूस की सेना की सहायता के लिए युद्ध क्षेत्र में उतार दिया।'
दो लाख रुपये का दिया था लालच
उन्होंने आगे कहा, 'शुरुआत में परिवार को हर महीने दो लाख रुपये देने का वादा किया था। मगर अब तक कोई वेतन नहीं मिला है। इतना ही नहीं, जून में एक शिविर से दूसरी जगह जाते समय मेरे पति ने अपना सामान और मोबाइल फोन खो दिया, जिससे दो महीने तक उनसे कुछ बात नहीं हो सकी। अगस्त के आखिरी हफ्ते में कैसे भी करके उन्होंने सारी बात बताई।'
जोइसी ने कहा कि उन्होंने अपने एटीएम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज खो दिए हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें वेतन मिल रहा है या नहीं, लेकिन वे अब तक एक भी रुपया घर नहीं भेज पाए हैं। अकेले अपने नवजात शिशु और बिनिल के बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल कर रही हूं। यहां तक कि जैन के परिवार में भी यही हालात हैं। बता दें, जैन, जिनका घर जोइसी के घर के पास स्थित है, उनके चचेरे भाई हैं।