भाजपा के नेता अपना दल(एस) की नेता अनुप्रिया पटेल को बहुत भाव नहीं दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश के एक बड़े भाजपा नेता का कहना है कि अनुप्रिया पटेल पहले भी संबंध खत्म करने की चेतावनी दे चुकी हैं। उन्होंने दो फरवरी को एक कार्यक्रम के दौरान भी भाजपा को 20 फरवरी तक का अल्टीमेटम दिया था।
हालांकि सूत्र का कहना है कि उनके गठबंधन में बने रहने या न रहने के बारे में कोई भी नीतिगत निर्णय भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लेंगे। सूत्र का कहना है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सब पता है। पार्टी के नेता इसे अनुप्रिया पटेल की दबाव बनाने की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
सूत्र का कहना है कि भाजपा ने अनुप्रिया पटेल की पार्टी को 2014 से अब तक काफी कुछ दिया है। पार्टी गठबंधन में अपना दल को बनाए रखने के पक्ष में है। इसलिए अपना दल के 20 फरवरी या 28 फरवरी का समय दिए जाने के बाद भी भाजपा की तरफ से कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है। बताते हैं अपना दल से दो सांसद चुनकर आए थे। एक प्रतापगढ़ से कुंवर हरिबंश सिंह और दूसरी अनुप्रिया पटेल। इसके बाद अपना दल का विभाजन हो गया।
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना दल (एस) के साथ तालमेल किया था। इस तालमेल में अपना दल को 11 सीटें मिली थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व के चलते पार्टी 9 सीटें जीत गई थी। उत्तर प्रदेश में भाजपा गठबंधन ने प्रचंड 325 सीटों के प्रचंड बहुमत को प्राप्त किया था। उत्तर प्रदेश के एक मंत्री और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले मंत्री का कहना है कि अपना दल उ.प्र. सरकार में मंत्री पद चाहता है। इसके अलावा अनुप्रिया की कोशिश उत्तर प्रदेश में लोकसभा की अधिक सीटें हासिल करना भी है।
वरिष्ठ नेता के अनुसार गोंडा में भी एक कार्यक्रम के दौरान अपना दल की नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने अपना दर्द साझा किया था। गोंडा में भी उन्होंने भाजपा नेतृत्व से विचार करने के लिए कहा था। यह खबर समाचार पत्रों में भी आई थी, लेकिन अभी तक भाजपा ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं है। भाजपा अपने सहयोगियों को साथ बनाए रखने के लिए आखिरी समय तक कोशिश करती है।