एंटीलिया के बाहर मिली विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो और उसका मालिक मनसुख (फाइल फोटो)
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रिलायंस समूह के मालिक मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर मिली विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो कार के मालिक मनसुख हिरेन की मौत मामले में नया मोड़ आ गया है। जिस पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाजे को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी उसने चार महीने तक इस स्कॉर्पियो कार का इस्तेमाल किया था। हिरण की पत्नी विमला हिरेन ने एटीएस को दिए जवाब में यह खुलासा किया है। उन्होंने आशंका जताई कि उनके पति की हत्या में भी सचिन वाजे का हाथ है।
मनसुख हिरेन की मौत के मामले में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने एफआईआर दर्ज करने के बाद मनसुख की पत्नी का जवाब दाखिल किया। विमला ने बताया कि सचिन वाजे उनके पति के संपर्क में थे। नवंबर 2020 में वाजे ने मनसुख से स्कॉर्पियो कार इस्तेमाल करने के लिए ली थी। 5 फरवरी 2021 को वाजे ने अपने ड्राइवर के हाथों कार वापस लौटा दी थी।
विमला ने कहा, 'एंटीलिया के पास संदिग्ध अवस्था में कार मिलने के बाद 26 फरवरी को मेरे पति मनसुख इंस्पेक्टर सचिन वाजे के साथ मुंबई अपराध शाखा गए थे। उसके बाद तीन दिन लगातार सचिन वाजे क्राइम ब्रांच के दफ्तर ले गया।' उन्होंने बताया कि 'मनसुख ने जांच के दौरान जो जवाब दिए उसकी कॉपी भी घर लेकर आए और उन पर सचिन वाजे के हस्ताक्षर भी हैं। वाजे ने मनसुख से कहा था कि गिरफ्तार हो जाओ। दो-तीन दिन में जेल से बाहर निकाल लेंगे।'
सुबूत के बावजूद वाजे को क्यों बचाया जा रहा: फडणवीस
विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में विमला हिरेन के बयान का हवाला देते हुए पूछा कि सचिन वाजे के खिलाफ सुबूत होने के बावजूद उसे क्यों बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'मनसुख हिरेन की आखिरी लोकेशन वसई में मिली है। वसई के पार्षद धनंजय गावड़े और सचिन वाजे पर साल 2017 में 40 लाख रुपए रंगदारी मांगने का आरोप लगा था और दोनों इसी मामले में जमानत पर हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि 'हो सकता है कि ये दोनों मनसुख को वसई ले गए और हत्या को अंजाम दिया।' इसके बाद पुलिस ने दूसरे दिन मुंब्रा के रेतीबंदर खाड़ी में मनसुख हिरेन का शव बरामद किया। फडणवीस ने एटीएस की जांच पर भी सवाल उठाया जिस पर गृहमंत्री देशमुख ने कहा कि एटीएस की जांच सही दिशा में चल रही है।
सचिन वाजे के निलंबन और गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा विपक्ष
विधानसभा में विपक्ष सचिन वाजे को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तारी की मांग को लेकर अड़ गया। इससे सदन में जमकर हंगामा हुआ। फडणवीस ने सचिन को धारा 201 (सबूत मिटाने) के तहत तत्काल गिरफ्तार करने और निलंबित करने की मांग की। वहीं, परिवहन मंत्री अनिल परब ने मोहन डेलकर की आत्महत्या का जिक्र कर विपक्षी दल भाजपा को घेरने का प्रयास किया। इस पर फडणवीस ने दावा किया कि सुसाइड नोट में किसी भाजपा नेता का नाम नहीं है। प्रशासक का नाम है जो किसी राजनीतिक दल से संबंधित नहीं है।