पंजाब नेशनल बैंक में अरबों रुपये का घोटाला करने वाले प्रमुख आरोपी और गीतांजलि जेम्स के मालिक मेहुल चोकसी को लेकर एंटीगुआ सरकार ने कहा है कि अगर उन्हें चोकसी पर लगे आरोपों के बारे में पहले पता होता तो उसे नागरिकता ही नहीं दी जाती, उसके अनुरोध को उसी समय खारिज कर दिया जाता। एंटीगुआ के विदेश मंत्री ईपी चेट ग्रीन ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि अगर भारत सरकार मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को लेकर अनुरोध करती है तो उनकी सरकार इसमें भारत का पूरा सहयोग करेगी।
बता दें कि चोकसी ने नवंबर 2017 में एंटीगुआ की नागरिकता हासिल करने के बाद जनवरी में निष्ठा की शपथ भी ले ली थी। स्थानीय अखबार एंटीगुआ ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में कहा गया है ‘प्रतिष्ठित एजेंसियों’ द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय जांच’ कराने के बाद ही चोकसी के आवेदन को मंजूरी दी गई थी।
चोकसी ने भी हाल ही में एक बयान जारी करते हुए कहा था कि उसने इस कैरिबियाई देश की नागरिकता पूरी तरह से वैध तरीके से ली है। वह इस देश की नागरिकता मिलने से करीब 130 देशों में बिना वीजा के आ जा सकेगा। साथ ही उसे अपने व्यापार को फैलाने में भी आसानी होगी।
गौरतलब है कि मेहुल चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, चोकसी ने देश से भागने की योजना काफी पहले ही बना ली थी। वह बखूबी जानता था कि पीएनबी कर्मी गोकुलनाथ शेट्टी के रिटायर होने के बाद घोटाले का भंडाफोड़ होगा। ज्ञात हो कि वह गोकुलनाथ शेट्टी ही था जो चोकसी को गारंटी पत्र के नवीनीकरण में मदद करता था।
सूत्रों ने बताया कि मेहुल चोकसी ने योजनाबद्ध तरीके से जनवरी के पहले ही हफ्ते में देश से फरार हो गया था। सूत्रों की मानें तो फरार होने के बाद उसने बिना किसी देरी के एंटीगुआ जाकर 15 जनवरी को निष्ठा की शपथ भी ले ली थी।
इस मामले में पीएमएलए कोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को नए भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून के तहत समन जारी किया है। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर नीरव को 25 सितंबर और चोकसी को 26 सितंबर को पेश होने का निर्देश दिया है।