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थमेगा वायरस: लैब में एंटी वायरल कोटिंग तैयार, जो सतह से खत्म करेगी संक्रमण

Wed, 14 Jul 2021 03:50 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

शोधकर्ताओं की टीम ने  पाया इस कोटिंग को कई बार धोने के बाद भी इसकी एंटीवायरस क्षमता में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।  इसे बार-बार संपर्क में आने वाले सतहों से वायरस के संचरण को रोका जा सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी गांधीनगर ने एक ऐसी एंटीवायरस कोटिंग तैयार की है, जिसकी मदद से सतह से होने वाले बाहरी संक्रमण को रोका जा सकता है।  

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अक्सर वायरल संक्रमण खासतौर पर सर्दी, जुकाम खांसी, खसरा और चिकन पॉक्स जैसी कई बीमारियों का कारण बनते हैं। कभी-कभी इन वायरल संक्रमण को गंभीर करके  डिहाइड्रेशन, निमोनिया जैसी बीमारियों का कारण भी बनते हैं। यह एंटी वायरस कोटिंग  सभी प्रकार की सतह पर आसानी से प्रयोग हो सकता है, और यह लंबे समय तक टिकता है इसलिए यह टिकाऊ और खासा मुफीद भी है।  
        
यह रोग जनक वायरस पर अत्यधिक प्रभावी, पर्यावरण के अनुकूल और पारदर्शी है। यह  किसी भी आंशिक और बाहरी वस्तुओं जैसे कांच की खिड़कियों, ऑटोमोबाइल, दरवाजे के हैंडल और प्लास्टिक के फर्नीचर कैसे भी हैंडल और सतहों पर आसानी से प्रयोग किया  जा सकता है।  
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कोरोना वायरस पर इसकी सटीकता  का परीक्षण अभी किया नहीं गया है। शोधकर्ताओं की टीम ने  पाया इस कोटिंग को कई बार धोने के बाद भी इसकी एंटीवायरस क्षमता में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।  इसे बार-बार संपर्क में आने वाले सतहों से वायरस के संचरण को रोका जा सकता है।

इंडिया साइंस वायर के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक इसके शुरुआती परीक्षण खासे उत्साहजनक हैं।  इस एंटी वायरस कोटिंग ने शोध के दौरान संतोषजनक परिणाम दिए हैं।  

इस कोटिंग के निर्माण में सुरक्षित तत्वों का प्रयोग किया गया है, जो  की प्रकृति में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिसके चलते यह पर्यावरण अनुकूल भी हो जाती है। जबकि गैर साइकोमेट्रिक अनाकाल टाइटेनियम ऑक्साइड के गैर विषैले और आवश्यक तत्व पृथ्वी की पपड़ी में उच्च उपस्थिति  रखते हैं, इस कोटिंग को संश्लेषित करने के उपयोग में आते हैं जो इसे टिकाऊ और एंटीवायरल बनाते हैं।  कमरे के तापमान पर भी आसानी से प्रभावी साबित होती है, इसके अलावा यह लगभग 45 नैनोमीटर मोटा है जो सभी प्रकार की सतह पर आसानी से मिल सकता है।            

इस शोध को अंजाम देने वाली एमिला पांडे ने कहा इस कोटिंग के प्रयोग में सभी नतीजे खासे आशाजनक रहे हैं। यह ट्रांसपेरेंट होने के साथ कीमत में भी खासी मुफीद  है।  इसलिए शोध टीम फिलहाल इस कोटिंग को अन्य तरह के वायरल और बैक्टीरिया के विभिन्न प्रकारों  पर परीक्षण करने की प्रक्रिया में जुटी है।

हालांकि बाजार में पहले से ही कई तरह के एंटीवायरल कोटिंग मौजूद हैं जिनका प्रयोग वायरस को निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है। इसमें  यह कोटिंग चांदी और तांबे के आयनों को मुख्य तत्व के रूप में उपयोग करती है, क्योंकि  तांबा एक टॉक्सिक पदार्थ है और गैर पारदर्शी होता है। ऐसे में बंद जगहों पर इसका प्रयोग चुनौतीपूर्ण हो जाता है।  
                                                
इस शोधकर्ताओं की टीम में इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एमिला पांडे, सहायक प्रोफेसर अभय राज सिंह गौतम, बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर विरुपक्षी सोपिना और शोधार्थी निशाबेन पटेल और रवि तेजा शामिल हैं। टीम ने इस एंटी वायरल सतह कोटिंग और इसकी कोटिंग प्रक्रिया के लिए भारतीय पेटेंट भी दायर किया है।  यह शोध अंतरराष्ट्रीय शोध जनरल ऐलसेवियर के जर्नल ऑफ एलॉयज एंड कंपाउंड में प्रकाशित किया जा चुका है।

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