पिछले साल रिलीज हुई फिल्म 'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण' में आपने देखा होगा कि कैसे अमेरिकी सैटेलाइट भारत पर नजर रखते थे। उसे मार गिराने के लिए हमारे पास कोई क्षमता नहीं थी। फिल्म में दिखाया गया है कि अमेरिकी सैटेलाइट के डर से कई बार 'परमाणु परीक्षण' को छिपाना पड़ा। भारत के पास अब 'मिशन शक्ति' के तहत वह तकनीक आ आई है, जिसकी मदद से जासूसी करने वाले किसी भी सैटेलाइट को मार गिराया जा सकता है।
इसरो के पूर्व वैज्ञानिक बीएस भाटिया बताते हैं कि 'मिशन शक्ति' की सफलता के बाद हम कह सकते हैं कि अब कोई भी देश हमारी सुरक्षा में सैटेलाइट के जरिए सेंध नहीं लगा सकता। अगर कोई देश ऐसा दुस्साहस करता है तो उसके सैटेलाइट को मार गिराया जाएगा। ऐसा बहुत बार देखने में आया है कि शक्तिशाली देश सैटेलाइट के जरिये किसी भी देश की जासूसी कर लेते हैं।
रक्षा विशेषज्ञ ध्रुव कटोच का कहना है कि दूसरे देश अब हमारी ओर आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर सकेंगे। एंटी सैटेलाइट हथियार, का सफलतापूर्वक परीक्षण हमारे लिए गौरव की बात है। तकनीकी क्षमता जांचने के लिए भारत ने जो सेसैटेलाइट गिराया है, वह किसी दूसरे देश का नहीं है। यह संभावित है कि इसरो ने उसे एक-दो माह पहले अंतरिक्ष में भेजा हो।
आईडीएसए के वरिष्ठ फेलो अजय लेले का कहना है कि भारत ने अंतरिक्ष में टारगेट तय करने के लिए अपना ही एक सेटेलाइट भेजा था। उसी टारगेट को मिशन शक्ति के तहत मार गिराया गया है। इसमें किसी देश को कोई नुकसान या आपत्ति हो, ऐसा नहीं है। यह हमारा अपना एक सफल परीक्षण है।