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'अब बातचीत का समय खत्म': अरुणाचल में बांध विरोधी आंदोलनकारी ने ठुकराया सरकार का बातचीत का न्योता; क्या कहा?

Fri, 06 Nov 2026 10:39 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, ईटानगर।

सार

अरुणाचल में 11,200 मेगावाट की सियांग बांध परियोजना को लेकर सरकार और आदि समुदाय के बीच टकराव बढ़ गया है। आंदोलनकारी काटोन मोयोंग ने बातचीत का न्योता ठुकराते हुए साफ कह दिया कि अब बातचीत का समय निकल चुका है। आखिर बांध को लेकर समुदाय क्यों कर रहा इतना विरोध, पूरा मामला है क्या? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 
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अरुणाचल प्रदेश में बांध विरोधी प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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अरुणाचल प्रदेश में बांध बनाने का विरोध तेज हो गया है। आंदोलनकारी काटोन मोयोंग ने राज्य सरकार का बातचीत का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। उन्हें 'अबोर मैन' के नाम से भी जाना जाता है। वह सियांग घाटी में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब बातचीत का समय निकल चुका है।

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मोयोंग पहले इंजीनियर थे। अब वह इस परियोजना के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में उन्होंने इस परियोजना के विरोध में प्रदर्शन किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। मोयोंग ने बांध बनाने के लिए सरकार की ओर से दी जा रही राष्ट्रीय सुरक्षा की दलील को खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोगों के विरोध को दबाने के लिए यह दलील दे रही है।

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क्या है सियांग जलविद्युत परियोजना?
सियांग अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट (एसयूएमपी) पूर्वोत्तर की बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है। इसके तहत अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर बड़ा बांध बनाया जाना है। इस परियोजना को सरकारी कंपनी नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) पूरा करेगी। इस परियोजना का आदि समुदाय कड़ा विरोध कर रहा है। खासकर सियांग क्षेत्र में विरोध हो रहा है। समुदाय को कई आशंकाएं हैं।

उसे चिंता है कि परियोजना से लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं। पुश्तैनी जमीन और जंगल पानी में डूब सकते हैं। इससे उनकी संस्कृति और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच सकता है। अरुणाचल प्रदेश सरकार ने परियोजना का मकसद बताया है। सरकार के मुताबिक, इससे सियांग नदी घाटी में पानी जमा किया जाएगा। पानी का बेहतर प्रबंधन भी किया जाएगा।

सरकार ने चीन की परियोजना का भी जिक्र किया है। चीन नदी के ऊपरी हिस्से में एक विशाल बांध बनाने की योजना बना रहा है। सरकार का कहना है कि इसी चिंता को देखते हुए सियांग परियोजना जरूरी है।

मोयोंग ने सरकार की मंशा पर क्या आरोप लगाए?
मोयोंग ने कहा कि प्रस्तावित बांध के खिलाफ आदि समुदाय का रुख नहीं बदला है। उन्होंने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए इस परियोजना को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की नजर 2029 के विधानसभा चुनाव पर है।

मोयोंग ने अरुणाचल प्रदेश के मूल निवासी समुदायों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी समुदाय इस परियोजना के खिलाफ साथ आएं। साथ ही उन्होंने जनजातियों के बीच 'फूट डालने की कोशिशों' से सावधान रहने को कहा। मोयोंग ने गुरुवार को अरुणाचल प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा, सियांग अपर मल्टीपरपज प्रोजेक्ट (एसयूएमपी) पर चर्चा का समय निकल चुका है।

उन्होंने आगे कहा, छोटी नदियों पर बांध बनने दें, लेकिन सियांग पर नहीं। सियांग बांध बनाने के लिए या तो पूरे आदि समुदाय को खत्म करना होगा या फिर सियांग पर कोई बांध नहीं बनेगा।

1979 में भी आया था बांध बनाने का प्रस्ताव?
मोयोंग ने दावा किया कि सियांग नदी पर बांध बनाने का पहला प्रस्ताव 1979 में आया था। उस समय इसे ब्रह्मपुत्र में बाढ़ रोकने की योजना बताया गया था। लेकिन आदि समुदाय ने इसका विरोध किया था। उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत दोरजी खांडू की सरकार पर भी आरोप लगाए। मोयोंग के मुताबिक, उस सरकार ने बिजली परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों के साथ 145 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे।

इनमें बिजली परियोजनाओं के विकासकर्ता और निजी कंपनियां शामिल थीं। मोयोंग ने आरोप लगाया कि इन समझौतों के कारण राज्य पर भारी कर्ज का बोझ बढ़ा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग सरकारें इस परियोजना की वजह बदलती रहीं। पहले इसे बाढ़ नियंत्रण की योजना बताया गया। बाद में इसे राष्ट्रीय हित की परियोजना कहा गया। फिर इसे राष्ट्रीय परियोजना बताया गया। मोयोंग के मुताबिक, अब मौजूदा सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बता रही है।

प्रदर्शनकारी सरकार से क्या मांग कर रहे हैं?
प्रदर्शनकारी परियोजना से जुड़ा काम तुरंत रोकने की मांग कर रहे हैं। इसमें प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। वे सर्वेक्षण का काम भी रोकने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने सुरक्षा बलों को हटाने की मांग की है। ये बल उन इलाकों में तैनात हैं, जो प्रस्तावित परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं।
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हालांकि, सरकार इस परियोजना के पक्ष में है। उसका कहना है कि 11,000 मेगावाट की यह परियोजना राज्य के विकास को बढ़ावा देगी। इससे आर्थिक और सामाजिक विकास होगा। सरकार के मुताबिक, युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उनके लिए स्वरोजगार के रास्ते भी खुलेंगे। इससे राज्य और देश की जल सुरक्षा मजबूत होगी। ऊर्जा सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।

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