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सुशांत सिंह राजपूत मामला: इन दो सवालों के जवाब पर टिकी है सीबीआई की जांच

Thu, 27 Aug 2020 07:00 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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सुशांत सिंह राजपूत (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। रोज इस मामले में नए खुलासे हो रहे हैं, नई जानकारियां सामने आ रही हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। एजेंसी की जांच मुख्य रूप से दो सवालों पर टिकी है। अगर इन सवालों के जवाब मिल जाते हैं तो सीबीआई के लिए इस मामले की गुत्थी सुलझाना काफी आसान हो सकता है। 

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1. सुशांत को सबसे पहले फंदे पर लटका हुआ किसने देखा
इस मामले में अभी तक यही साफ नहीं हो पाया है कि सुशांत सिंह राजपूत को फंदे से लटका हुआ सबसे पहले किसने देखा था। 14 जून को हुई इस घटना के दौरान घटनास्थल पर सुशांत के अलावा चार लोग थे। इनमें से तीन सुशांत के नौकर थे और उनका दोस्त सिद्धार्थ पिठानी था। सीबीआई इनसे लगातार पूछताछ कर रही है। 

पूछताछ में सामने आया है कि इन चारों में से दो के बयानों में अंतर है। जिन दो लोगों के बयान मेल नहीं खा रहे हैं उनमें सुशांत का बावर्ची नीरज और उनका दोस्त सिद्धार्थ पिठानी है। नीरज ने ही 14 जून की सुबह सुशांत को जूस दिया था, जिसके बाद सुशांत अपने कमरे में चले गए थे और दरवाजा बंद कर लिया था। 

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2. आखिर किसने की सुशांत सिंह राजपूत की मौत की पु्ष्टि

नीरज ही थोड़ी देर बाद सुशांत से भोजन को लेकर पूछने गया था, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। इस दौरान वहां दूसरा बावर्ची दीपेश और सिद्धार्थ पिठानी भी वहां थे। दरवाजा नहीं खुलने पर पिठानी ने ही चाबी बनाने वाले को बुलाया था। सीबीआई जानने की कोशिश कर रही है कि सुशांत को फंदे पर लटका हुआ किसने देखा था।

अब तक मिली जानकारी के अनुसार सुशांत के शव को फंदे से पिठानी ने नौकरों की मौजूदगी में उतारा था। सीबीआई सिद्धार्थ से लगातार पूछताछ कर रही है। सीबीआई जानना चाहती है कि चारों में से किसने सुशांत की मौत की पुष्टि की थी। पूरे मामले में पिठानी अहम गवाह है। वह उस घर में सुशांत के साथ ही रहता था। 

सात दिन से मामले की जांच में जुटी सीबीआई को सुशांत के बावर्ची और पिठानी से कई दौर की पूछताछ में बेमेल बयान सुनने को मिले हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दोनों में से सच कौन बोल रहा है और गलत जानकारी कौन दे रहा है। इस सवाल का जवाब सीबीआई के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।
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