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Punjab: पंजाब में दे दना दन ड्रोन, चीन निर्मित इन ड्रोनों को BSF की नजर से बचाने के लिए किए ये जुगाड़

सार

Punjab: बीएसएफ ने शुक्रवार को अमृतसर सेक्टर में जो ड्रोन मार गिराया है, वह छह फुट लंबा है। उसमें 25 हजार एमएच की बैटरी लगी है। यह ड्रोन 25 किलोग्राम सामान ले जा सकता है। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन में अब कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं...
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Pakistani drone shot down by BSF along Punjab border - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पाकिस्तान की तरफ से हथियार, कारतूस और ड्रग्स के पैकेट लेकर पंजाब (Punjab) में आने वाले ड्रोन की संख्या एकाएक बढ़ गई है। पहले एक दो सप्ताह में ऐसे ड्रोन दिखाई पड़ते थे, मगर पिछले कुछ दिनों से ड्रोन आने की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। रोजाना ही कोई न कोई ड्रोन भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहा है। चूंकि बॉर्डर पर बीएसएफ ने दर्जनों ड्रोन मार गिराए हैं, ऐसे में पाकिस्तान से आने वाले चीन निर्मित ड्रोन के सिस्टम में कई तरह के बदलाव किए जा रहे हैं। बीएसएफ से बचने के लिए ड्रोन की आवाज और उसकी लाइट को मंद किया जा रहा है। इन दिनों पंजाब से लगते भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर घना कोहरा छाया है। ड्रोन की कम आवाज और ब्लिंकर बंद होने की वजह से बीएसएफ को ड्रोन गिराने में कई राउंड फायर करने पड़ते हैं। हालांकि बीएसएफ तकनीक उपकरणों की मदद के अलावा मैनुअली भी ड्रोन से आए सामान को उठाने के लिए सीमा के करीब आने वालों पर पैनी नजर रख रही है।

25 किलोग्राम सामान लाने वाले ड्रोन

बीएसएफ ने शुक्रवार को अमृतसर सेक्टर में जो ड्रोन मार गिराया है, वह छह फुट लंबा है। उसमें 25 हजार एमएच की बैटरी लगी है। यह ड्रोन 25 किलोग्राम सामान ले जा सकता है। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन में अब कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पहले जो ड्रोन आते थे, उनकी आवाज साफ सुनाई पड़ती थी। साथ ही वह ड्रोन रात को या तड़के आता था, तो उसके ब्लिंकर नजर आते थे। इससे बीएसएफ को निशाना साधने में दिक्कत नहीं आती थी। अब ड्रोन में दो तरह के बदलाव किए गए हैं। पहला तो उसकी आवाज कम कर दी गई है। दूसरा, उसकी लाइट यानी ब्लिंकर को बहुत हल्का कर दिया गया है। यानी ज्यादा दूर से वह ड्रोन नजर नहीं आता। ऐसे में बीएसएफ को हर पल सतर्कता बरतनी पड़ती है।

तस्करों पर इस तरह शिकंजा कस रही बीएसएफ

सीमा सुरक्षा बल ने तकनीक की मदद लेने के अलावा मैनुअली भी तस्करों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कई बार घनी धुंध के बीच ड्रोन नजर नहीं आता। ऐसे में तस्कर, हथियार और ड्रग्स के पैकेट हासिल करने में कामयाब हो जाते थे। बीएसएफ ने अब उन सभी रास्तों पर अपनी टीम लगा दी हैं जहां से तस्कर, बॉर्डर की तरफ आते हैं। इसका यह फायदा हुआ है कि कोई ड्रोन जो बीएसएफ की नजर में नहीं आया हो, और वह तस्करों के हाथ लग गया हो, तो उस स्थिति में बीएसएफ की टीमें उन तस्करों को पकड़ सकती हैं।

बीएसएफ ने बॉर्डर के आसपास उन सभी रास्तों का एक मैप तैयार किया है, जहां से कोई व्यक्ति बॉर्डर की तरफ आ सकता है। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने बीएसएफ के रेजिंग डे से पहले कहा था कि कुछ माह में पाकिस्तान की तरफ से लगभग दो सौ ड्रोन पंजाब की सीमा में आ चुके हैं। तस्करों ने बीएसएफ के पास मौजूद हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर (एचएचटीआई) तकनीक को गच्चा देने का प्रयास किया है। तस्कर या आतंकी संगठनों के ओवर ग्राउंड वर्कर, अपने शरीर पर भीगी हुई बोरी लपेट लेते हैं। इससे उनके शरीर का तापमान नीचे चला जाता है और वे एचएचटीआई की पकड़ में आने से बच जाते हैं। बॉर्डर के निकट वे रेंग कर चलते हैं, ताकि एचएचटीआई में किसी इंसान की इमेज की बजाए जानवर की छवि दिखाई पड़े।

'सीआईबीएमएस' के जरिए सर्विलांस का रोडमैप तैयार

पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सर्विलांस के लिए बीएसएफ द्वारा 'तीसरी आंख' का इस्तेमाल शुरू किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के 2290 किलोमीटर लंबे हिस्से पर 'सीआईबीएमएस' के जरिए सर्विलांस, इसका भी रोडमैप तैयार है। पाकिस्तान की तरफ से आने वाले ड्रोन, का पता लगाने के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम 'एडीएस' लगे वाहनों की खरीद का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन है। सीमा सुरक्षा बल को अगर यह सिस्टम मिल जाता है, तो बॉर्डर पर पाकिस्तान की ओर से आने वाले ड्रोन का समय रहते पता लगाया जा सकता है। चूंकि यह सिस्टम वाहनों पर लगा होगा, ऐसे में एडीएस को इधर-उधर ले जाने में आसानी होगी। इस सिस्टम की मदद से भारतीय सीमा में रात को या धुंध के दौरान आने वाले ड्रोन का भी पता लगाया जा सकता है। बीएसएफ के पास मौजूदा समय में इस्राइल के 21 'लांग रेंज रिकोनिसेंस एंड ऑब्जर्वेशन सिस्टम' (लोरोस) हैं। हालांकि अभी 19 लोरोस काम कर रहे हैं, तकनीकी खराबी के चलते दो उपकरण बॉर्डर साइट पर नहीं हैं। इसके जरिए दिन में 12 किलोमीटर दूर से किसी मानव का पता लगाया जाता है। 13 किलोमीटर दूर से वाहन का पता चल जाता है। बल के पास एचएचटीआई व सर्विलांस के दूसरे उपकरण भी मौजूद हैं।

बीस किलोमीटर की रेंज वाले उपकरण मिलेंगे

थर्मल कैमरा, किसी ऑब्जेक्ट से पैदा हुई गर्मी के आधार पर काम करता है। कैमरे द्वारा ऑब्जेक्ट के तापमान को डिटेक्ट कर उसकी थर्मल इमेज, स्क्रीन पर दिखाई जाती है। जब बॉडी का तापमान नीचे चला जाता है, तो एचएचटीआई में उसकी इमेज स्पष्ट नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में बीएसएफ एक दूसरा तरीका भी अपनाती है। बॉर्डर की तरफ जितने भी रास्ते जाते हैं, वहां जवान छिपकर बैठ जाते हैं। इसके अलावा झाड़ियों में भी जवान छिपे रहते हैं। जैसे ही स्मगलर वहां से गुजरता है, उसे दबोच लिया जाता है। बीएसएफ अधिकारियों के मुताबिक, अब बीस किलोमीटर की रेंज वाले 'लोरोस या एचएचटीआई' खरीदने का प्रपोजल तैयार है। नए उपकरणों को इतनी ऊंचाई पर लगाया जाएगा कि स्मगलर को छिपने या सुरक्षा बलों को गच्चा देने का कोई मौका ही न मिले। उपकरणों की ऊंचाई जब इतनी ज्यादा होगी तो पेड़ आदि सर्विलांस में बाधा नहीं बनेंगे। इन उपकरणों की मदद से बॉर्डर पर घने अंधेरे और कोहरे में भी स्मगलर या दुश्मन को पहचाना जा सकेगा। बल ने हैंड हैल्ड थर्मल इमेजर 'एचएचटीआई' (अनकूल्ड) लांग रेंज वर्जन वाले कैमरे खरीदे हैं। बीएसएफ को बहुत जल्द 546 'एचएचटीआई' (अनकूल्ड) लांग रेंज वर्जन कैमरे मिलेंगे। इसके बाद 878 'एचएचटीआई' कैमरे खरीदे जाएंगे। इनमें 842 (अनकूल्ड) और 36 (कूल्ड) कैमरे खरीदने की प्रक्रिया जारी है।

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