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एक और निर्भया: मां को उम्मीद, मेरी बेटी को भी मिलेगा न्याय

Sun, 07 May 2017 04:42 PM IST
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़
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nirbhaya
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निर्भया के दरिंदों को सजा-ए-मौत की खबर ने हरदुआगंज की बिटिया के दरिंदों की धड़कनें बढ़ा दी होंगी। वहीं बिटिया की मां के चेहरे पर उम्मीद की किरण साफ झलकती है। उन्हें उम्मीद जागी है कि बेटी के दरिंदों को भी इसी तरह सजा-ए-मौत मिलेगी। वह तमाम अड़चनों के बाद भी अडिग रहकर मुकदमे की पैरवी कर रही हैं और गांव में अकेले रहकर हर रोज तरह-तरह से धमकियों को झेलती हैं। इन्हीं धमकियों के चलते उन्होंने नाबालिग बेटे को सुदूर रिश्तेदारी में छोड़ दिया है।
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वाकया 23 दिसंबर 2015 की तड़के का है, जब गांव गुरसिखरन के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली 11वीं की छात्रा रोजाना की तरह साइकिल से ट्यूशन जा रही थी। करीब पौने आठ बजे जैसे ही वह ईंट भट्ठा के पास पहुंची, तभी बाइक पर मौजूद तीन दरिंदों ने उसे घेर लिया और उसकी साइकिल गिरा दी। इसके बाद उसे घसीटते हुए ईख के खेत में ले जाया गया। जहां उसके साथ बेरहमी से दुष्कर्म किया। इसके बाद उसी के दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई। किशोरी की लाश देखकर ही लग रहा था कि उसे बेहद दरिंदगी से मारा गया था। उसके चेहरे व सीने पर खरोंच के काफी निशान थे। जमीन पर घसीटने के कारण पीठ बुरी तरह से छिली हुई थी।

इसके अलावा शरीर के अन्य कई हिस्सों व दुप्तांगों पर भी चोट के निशान थे। एक पैर में उसकी जींस की पेंट फंसी थी और उसी के दुपट्टे से गला घोंटा गया था। बाद में पुलिस जांच में पता चला कि इस घटना से आठ दिन पहले उसे छेड़ा गया था और बात परिवार में खुली तो उसने स्कूल व ट्यूशन जाने का रास्ता तक बदल दिया गया।
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इधर, इस घटना के विरोध में पहले दिन बवाल के बाद कई दिन तक बाजार बंदी, उग्र प्रदर्शन, धरने आदि हुए थे। बाद में पुलिस ने खुलासा करते हुए गांव के ही नाबालिग आरोपी सहित दूसरे आरोपी चतुरा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में गोल्डी नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

धमकियों की कहानी, मां की जुबानी

nirbhaya - फोटो : अमर उजाला
गांव में अकेली रहती बेटी की मां की सुनें तो इससे बड़ी सभी पांच बेटियों की शादी हो चुकी है। पति का घटना से पहले देहांत हो चुका था, जबकि बूढ़ी सास इस घटना के कुछ समय बाद चल बसी। एक नाबालिग बेटा है, जिसे आरोपी परिवारों की ओर से मिलने वाली धमकियों की दहशत में सुदूर रिश्तेदारी में रखा गया है। अब मां अकेली ही गांव में रहकर मुकदमे की पैरवी कर रही हैं। मुकदमे में चार्ज लग चुका है और जल्द गवाही की शुरुआत होनी है।

वह कहती हैं कि निर्भया कांड ने उन्हें उम्मीद बंधाई है। मगर उनकी बेटी संग दरिंदगी व हत्या के एक नाबालिग आरोपी को जमानत मिलने के कारण उनके मन में टीस है। दूसरे मुख्य आरोपी चतुरा को भी हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। उस पर रासुका के तहत कार्रवाई हुई। इसलिए अभी तक वह जेल में है। गोल्डी की ओर से कोई पैरोकार नहीं आया। वह कहती हैं कि कितनी ही धमकियां क्यों न मिलें, वह मुकदमे को अंजाम तक पहुंचाने को पैरवी करती रहेंगी। उनके मुकदमे में निर्भया का केस नजीर बने, इस बात के भी वह अदालत स्तर में प्रयास करेंगी।
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नगला कलार कांड पीड़ित मां भी सजा से सहमत

17/18 अप्रैल 2013 की रात महानगर के बन्नादेवी के नगला कलार के मजदूर परिवार की छह वर्षीय बच्ची को आरोपी उठा ले गया और बाद में रेप के बाद हत्याकर शव खाली प्लाट में डाल गया। सुबह लाश मिलने पर जब बवाल शुरू हुआ तो पुलिस से पब्लिक की जमकर भिड़ंत हुई और उपद्रव इस कदर हुआ कि तत्कालीन सीओ द्वितीय एके सिंह को सीधे शासन स्तर से निलंबित किया गया।

मामले में सुप्रीम कोर्ट तक ने स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज पर कड़ी आपत्ति जताई। इस मुकदमे का आरोपी खुद की नश काटकर पुलिस के पास पहुंच गया और घटना पर अफसोस जताया। मगर परिवार चाहता है कि उसे भी निर्भया की तरह सजा मिले। बेटी की मां को इस बात की तसल्ली है कि वह आज तक जेल में है। मगर वह चाहती है कि उसे भी इसी तरह सजा मिले। मुकदमा गवाही में लंबित है। अगली कुछ तारीखों पर गवाही के बाद सजा के बिंदु पर बहस होनी है। वह इस व्यवस्था पर खफा दिखी कि लंबे समय तक कानूनी औपचारिकताओं में सजा नहीं हो पाई है।
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