बिलकिस बानो मामले में एक और दोषी ने सुप्रीम कोर्ट से अपने 8 जनवरी के फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया है। शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार की ओर से दोषी को सजा में मिली छूट को रद्द कर दिया था। दोषी ने यह तर्क दिया है कि अपराध की प्रकृति और न्याय के लिए समाज की पुकार के आधार पर सजा में छूट को चुनौती नहीं दी जा सकती। दोषी रमेश रूपाभाई चंदन की ओर से दायर समीक्षा याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई, 2022 को शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ की ओर से पारित आदेश और फैसले को खारिज करते हुए गलती की। 11 दोषियों में से दो ने पहले ही 8 जनवरी के फैसले की समीक्षा के लिए याचिका दायर कर रखी है।