इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) से बैन किए गए संत अमोघ लीला दास एक बार सुर्खियों में आ गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह महिलाओं और उनके शरीर के प्रकार को लेकर गलत तरीके से बात कर रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने पर लोगों में गुस्सा पैदा गया है। उन्होंने वीडियो में जिम जाने की बजाय घरेलू कामों को करने की सलाह दी है। साथ ही कहा है कि महिलाओं के लिए यही उनके आदर्श हैं।
एक महीने के लिए लगा है प्रतिबंध
गौरतलब है, थोड़े दिन पहले उन्होंने स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस के बारे में भी टिप्पणी की थी। दास ने स्वामी विवेकानंद की मछली सेवन के लिए आलोचना करते हुए कहा था कि एक सदाचारी व्यक्ति कभी भी किसी प्राणी को हानि नहीं पहुंचा सकता। उन्होंने रामकृष्ण की शिक्षा "जतो मत ततो पथ" (जितनी राय, उतने रास्ते) पर भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा था कि हर रास्ता एक ही मंजिल तक नहीं जाता। विवाद बढ़ने पर इस्कॉन ने उन पर एक महीने के लिए बैन लगा दिया।
शरीर के आकार पर टिप्पणी
लीला दास पर बैन लगाने की घटना को तीन दिन भी नहीं हुआ है। ऐसे में एक और नया बवाल खड़ा हो गया। उनका लोगों ने एक कथित वीडियो देखा, जिसमें वह महिलाओं का मजाक उड़ा रहे थे। इतना ही नहीं वो किसी बिना शर्म के महिलाओं के शरीर पर भी टिप्पणी कर रहे थे।
वीडियो में यह कहा
वायरल वीडियो में अमोघ लीला दास को यह कहते सुना जा सकता है कि मैं लैपटॉप वाली लड़की हूं और बैठे-बैठे फिर थुंबा, बस का टायर एक दिन ट्रक का टायर। अरे बहन, अगर तू घर पर पौछा मारती ना, कभी कमरे का कमरा निकलता ही नहीं। दास आगे कहते हैं कि वो फिर ट्रेडमिल पर दौड़ती हैं, ऐसे दौड़ने का क्या फायदा, वहीं के वहीं रहीं। घर ही नंबर वन जिम होता है लड़कियों के लिए। उन्होंने कहा कि घर की चक्की चलाएगी ना तो वैसे ही डोले बन जाएंगे।
लोगों ने की आलोचना
उनका कथित वीडियो सामने आते ही कुछ लोगों ने संत की आलोचना करना शुरू कर दी है। वहीं, कुछ ने पूरे वीडियो की मांग की है। एक यूजर ने वीडियो को महिलाओं के प्रति असम्मान से भरा हुआ बताया। वहीं, एक ने लिखा कि यह वीडियो देखकर सिमोन द बुआ की याद आ गई उन्होंने कहा था स्त्री पैदा नहीं होती पैदा बल्कि बनाई जाती है। बचपन से उसके मन में इसी तरह के मिथक बैठा जाते हैं घर तुम्हारे लिए सबसे अच्छा है ,घर घरेलू के कार्यों में निपुण होना सबसे जरूरी है।
एक यूजर ने तो यह तक मांग कर दी की उन पर एक महीने का प्रतिबंध लगाने की बजाय आजीवन प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। यूजर ने लिखा कि जिस तरह से उन्होंने स्वामी विवेकानन्द और रामकृष्ण परमहंस की बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और अब महिलाओं पर टिप्पणी यह अस्वीकार्य है।