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येती के होने का दावा, नेपाली लोकसाहित्य में जुड़ा एक और अध्याय

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 01 May 2019 01:33 PM IST
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येती के पैरों के निशान - फोटो : PTI

भारतीय सेना ने सोमवार को ट्वीट कर कहा कि उनके पर्वतारोहण अभियान दल ने 9 अप्रैल को मकाबू बेस कैंप के करीब 32x15 इंच वाले रहस्यमयी हिममानव 'येती' के पैरों के निशान देखे हैं। इसकी तस्वीरें भी सेना ने शेयर कीं। जिसके बाद से दुनियाभर में एक बार फिर येती को लेकर सवाल खड़ा हो गया।



येती दुनिया के सबसे रहस्यमयी प्राणियों में से एक है, जिसकी कहानी 100 साल पुरानी बताई जाती है। येती की कहानियां नेपाल में काफी समय से प्रचलित हैं। भारतीय सेना के येती पर किए गए ट्वीट के बाद अब नेपाल के लोकसाहित्य में एक और अध्याय जुड़ गया है। 


अतीत में कई पर्वतारोहियों और स्थानीय लोगों ने भी येती को लेकर दावे किए हैं। किसी ने येती को देखा तो किसी ने उसके पैरों के निशान देखे। सेना ने कहा है कि इससे पहले यह मायावी स्नोमैन केवल मकालू-बरुन नेशनल पार्क में देखा गया था। 


बता दें येती की पहली तस्वीर साल 1951 में सामने आई थी। तब ब्रिटिश खोजकर्ता एरिक शिप्टन ने एक विशाल आकृति की तस्वीर ली थी, जिसमें पैरों के निशान स्पष्ट रूप से दिख रहे थे। ये निशान उन्हें नेपाल-तिब्बत सीमा पर मेनलुंग ग्लेशियर पर मिले थे। हालांकि कुछ लोगों ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि ये आकृति बर्फ पिघलने से बनी है।


येती की कहानियां 1920 के समय से सुनाई जाती रही हैं। उस दौरान इसे लेकर काफी खोजबीन भी की गई। इसे लेकर दो अभियान चलाए गए। 1953 में पर्वतारोही सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के समय बड़े-बड़े पैरों के निशान नजर आने की खबर दी थी। 


अपनी पहली आत्मकथा में तेनजिंग ने कहा था कि उन्होंने कभी येती को नहीं देखा, लेकिन उनका मानना है कि ये विशाल वानर थे। उनके पिता ने दो बार येती को देखने का दावा किया था। साल 1937 में नेपाल के माउंट मकालू पर एक अंग्रेज पर्वतारोही को येती के पैरों के निशान मिले थे। उन्होंने भी इसकी तस्वीरें लीं। लेकिन बाद में जांच करने पर पता चला की वो भालू के पैरों के निशान थे।


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