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उत्तरी कश्मीर के 'गुमनाम आतंकी' बने सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती

Sun, 03 Sep 2017 05:20 AM IST
गुंजन कुमार / नई दिल्ली
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उत्तरी कश्मीर में करीब 150 गुमनाम आतंकियों की मौजूदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन रही है। दक्षिणी कश्मीर में बुरहान बानी जैसे स्थानीय लड़कों के आतंकवाद अपनाने के बाद उन्हें खत्म करने में सफल रह रही एजेंसियां उत्तरी कश्मीर में पूरी तरीके से सेंध नहीं लगा पा रही हैं।
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इनमें से ज्यादातर आतंकी पाकिस्तानी जिनका प्रोफाईल एजेंसियों के पास नहीं। घाटी में आतंकवाद के खिलाफ बन रही नई रणनीति में उत्तरी कश्मीर के इन गुमनाम आतंकियों को खत्म करना पहली प्राथमिकता है।

उच्चपदस्थ खुफिया सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि पिछले हफ्ते पुलवामा में हुए फीदायीन हमले से पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के नए मंसूबे के गंभीर संकेत मिले हैं। इसकी जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। जबकि घाटी में लश्कर-ए-तोयबा की हरकत ज्यादा है और जैश की मौजूदगी नगण्य मानी जा रही थी।
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पढ़ें- कश्मीर में आतंकियों से निपटने को सुरक्षा बलों का संयुक्त एक्शन प्लान

पिछले महीने भर की कार्रवाई में मारे गए कई आतंकियों की पहचान भी नहीं हो पाई है। माना जा रहा है कि वह उत्तरी कश्मीर में छुपे गुमनाम आतंकियों में से ही हैं। सूत्रों के मुताबिक एजेंसियों को गंभीर अंदेशा है कि सीमा पार से घुसपैठ बदस्तूर जारी है। घुसपैठ रुकने के तमाम दावों से इतर किसी ऐसी जगह से घुसपैठ हो रही है जिसे रोका नहीं जा सकता है। 

दलील है कि घाटी में पिछले कुछ महीनों में मारे गए करीब 100 आतंकियों के बावजूद इनकी संख्या 290 से 300 पर टिकी हुई है। इनमें से करीब 150 उत्तरी कश्मीर में हैं। करीब 120 दक्षिण कश्मीर और 15 से 20 सेंट्रल कश्मीर में हरकत में हैं। दक्षिण और सेंट्रल कश्मीर के आतंकी ज्यादात्तर स्थानीय लड़के हैं जो एजेंसियों की नजर में हैं।

समस्या उत्तरी कश्मीर के गुमनाम आतंकियों को लेकर बनी हुई है। सूत्रों ने बताया कि  पाकिस्तान घुसपैठ जारी रख घाटी में आतंकियों की  संख्या 250 से 300 के आंकड़े से नीचे नहीं आने देने पर आमादा है। 
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