केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों ने कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का वायदा कर दिया है। इससे लगता है कि अब दिल्ली के कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लगभग 60 लाख लोगों को अपने घरों का मालिकाना हक मिल जाएगा। लेकिन इस क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि ये घोषणाएं महज चुनावी लॉलीपॉप हैं और पिछले 26 साल से इसी तरह की घोषणाएं चुनाव के दौरान की जाती रही हैं। इस तरह ऐसा लगता है कि एक बार फिर जनता के छले जाने की बारी है। विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने के लिए कई कानूनों में संसोधन करना पड़ेगा और जनता को विशेष रियायत देनी पड़ेगी। इसके लिए लंबा समय लगेगा। इसलिए यह घोषणा कि चुनाव के पहले लोगों को मालिकाना हक मिल जाएगा, बिल्कुल गलत है।
- 6 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने मालिकाना हक देने के मुद्दे पर विचार करने के लिए उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक 10 सदस्य समिति का गठन किया।
- 29 दिसंबर 2014 को भी 7 फरवरी 2015 को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव को नजर में रखते हुए मोदी कैबिनेट ने दिल्ली में 2000 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमित करने की घोषणा की थी।
- वर्ष 2012 में भी कॉलोनियों को नियमित करने की अधिसूचना केंद्र सरकार द्वारा जारी हुई थी, क्योंकि इसके अगले ही वर्ष 2013 में दिल्ली के विधानसभा चुनाव थे।
- दिसंबर 1993 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना ने 31 मार्च 1993 तक बनी 1071 कॉलोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित किया।
- अक्टूबर 2004 में दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार ने 31 मार्च 2002 तक बनी अनधिकृत कॉलोनियों से आवेदन और ले-आउट प्लान आमंत्रित किए। आरडब्ल्यूए के माध्यम से 448 ओवरलैपिंग के साथ कुल 1642 आवेदन सरकार के पास आए।
- वर्ष 2007 में यूपीए सरकार के केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने अनधिकृत कॉलोनी, गांव एवं झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण पर एक वर्ष के लिए कार्रवाई रोकने के लिए अधिसूचना जारी की।
- अक्टूबर 2008 में (दिसंबर 2008 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से केवल दो माह पहले) तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के नाम पर छत्रसाल स्टेडियम में एक विशाल रैली की। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों 1218 अनधिकृत कॉलोनियों को अंतरिम (प्रोविजनल) प्रमाण पत्र बंटवाया।