सिक्किम में अंकिता भंडारी की हत्या का मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में है। राज्य में विपक्षी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने मांग की है कि गौतम के सिक्किम के राज्यपाल का पद संभालने से पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच पूरी होनी चाहिए। इस मांग को लेकर एसडीएफ ने राज्य में चार जगहों पर कैंडल मार्च निकाला और पीड़ित परिवार के प्रति एकजुटता जताई।
एसडीएफ ने शनिवार को गंगटोक स्थित पार्टी मुख्यालय के साथ नामची और ग्यालशिंग के जिला कार्यालयों तथा जोरथांग स्थित पार्टी कार्यालय में कैंडल मार्च आयोजित किया। पार्टी के मुताबिक, हर जगह अंकिता की याद में 108 मोमबत्तियां जलाई गईं। इनका उद्देश्य पीड़ित को याद करना, उसके परिवार के साथ एकजुटता जताना और न्याय की मांग करना था। पार्टी ने कहा कि अंकिता के परिवार की ओर से उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच पूरी होने तक मामले को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग जारी रहेगी।
एसडीएफ ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर सवाल क्यों उठाए?
विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता दुष्यंत गौतम ही वह ‘वीआईपी’ थे, जिन्होंने 19 वर्षीय अंकिता भंडारी से कथित तौर पर अनुचित मांग की थी। हालांकि, यह आरोप है और गौतम ने इसे खारिज किया है। एसडीएफ ने अपने बयान में कहा कि अंकिता के परिवार की ओर से उठाए गए अनसुलझे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी की मांग है कि दुष्यंत गौतम के सिक्किम के राज्यपाल का पद संभालने से पहले सीबीआई जांच पूरी की जाए। एसडीएफ महिला मोर्चा की प्रभारी उपाध्यक्ष कोमल चामलिंग ने भी पहले गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जांच लंबित रहने के दौरान उन्हें राज्यपाल बनाना सिक्किम के लोगों का अपमान है।
अंकिता भंडारी की हत्या कब और कहां हुई थी?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को दोषी ठहराया गया था। पुलकित आर्य पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। मामले में एक अज्ञात वीआईपी की कथित भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ। अंकिता के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहलू की जांच की मांग की। इसी संदर्भ में दुष्यंत गौतम का नाम आरोपों में उठाया गया है। गौतम ने आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही भी शुरू की है।
राज्यपाल को मिलने वाली संवैधानिक छूट पर क्या है विवाद?
एसडीएफ ने संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल को मिलने वाली संवैधानिक छूट पर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि अंकिता मामले में जिन सवालों के जवाब बाकी हैं, उनकी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। एसडीएफ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने जोर दिया कि अंकिता के परिवार को न्याय मिलना चाहिए। विवाद का एक प्रमुख सवाल यह है कि राज्यपाल पद संभालने के बाद संवैधानिक छूट का जांच पर क्या असर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर क्या कहा?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर चिंता जताई थी। उन्होंने पत्र में कहा कि राज्यपाल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती और न ही जारी रखी जा सकती। राहुल गांधी के मुताबिक, गौतम को राज्यपाल नियुक्त करने से वह सीबीआई की पहुंच से बाहर हो सकते हैं, जबकि एजेंसी इस मामले की जांच कर रही है। इस तरह अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब जांच की मांग के साथ राज्यपाल की नियुक्ति और संवैधानिक छूट का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।