कोचिंग सेंटर में 31 बच्चों से लेकर करोड़ों बच्चों की हाईटेक ऑनलाइन क्लास चलाने का सफर आसान नहीं था। इसके लिए कड़ी मेहनत के साथ बड़े फैसले लेने पड़े। यह सफर है अंकित भाटी का, जो 'रोजगार विद अंकित' नाम से यूट्यूब चैनल चलाते हैं।
पढ़ाने की शुरुआत कब हुई?
नौकरी के साथ कोचिंग में पढ़ाना कितना मुश्किल था?
2011 में पहली नौकरी चंडीगढ़ में लगी। इसे ज्वाइन नहीं किया क्योंकि वहां पढ़ाना रुक जाता। 2012 में दिल्ली में विदेश मंत्रालय में नौकरी लगी, तो बच्चों को पढ़ाना जारी रखा। रोज सुबह छह से आठ बजे तक पढ़ाने के बाद ऑफिस के लिए निकलना होता था।
सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला कितना कठिन था?
सोचा नहीं था कि नौकरी छोड़नी पड़ेगी। कोई भी निर्णय लेने से पहले पापा से जरूर बात करता हूं। पत्नी को बताता हूं। माता जी हमेशा साथ होती हैं। पत्नी सरकारी टीचर हैं, तो विश्वास था कि अगर एक का काम फेल भी हुआ, तो गुजारा हो जाएगा। दो महीने की छुट्टी लेकर पूरी तरह से पढ़ाया और इसके बाद नौकरी छोड़ दी।
टीम के तौर पर कब से काम शुरू किया?
15 अगस्त, 2020 को टीम के तौर पर काम शुरू किया। हमारे पास 20 लाख रुपये थे। 'आजाद' नाम से एक बैच लेकर आए। इसमें हर बच्चे को 500 रुपये देने थे। सोचा बैच नहीं बिका, तो पास से सैलरी दे देंगे और बैच बंद कर देंगे। इसे 25,000 बच्चों ने खरीदा। इस तरह 1.25 करोड़ आ गए। अगला बैच फ्री दिया। आज हमारे क्लासेज पूरी तरह ऑनलाइन हैं। 80 फीसदी बच्चे गांव के हैं, इसलिए कोर्स 500-1,000 रुपये के बीच ही रखते हैं। टीम में 75 टीचर सहित 300 लोग हैं। यूट्यूब चैनल पर 1.35 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। रोजाना 205 लेक्चर रिकॉर्ड करते हैं। 17 स्टूडियो ऑफिस में हैं और 13 अध्यापकों के घर पर हैं।