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Surtaal: अंजना वेलफेयर सोसाइटी ने किया सुरताल महोत्सव का आयोजन, कला-साहित्य जगत की हस्तियां हुईं शामिल

Mon, 30 Dec 2024 02:29 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सेशेल्स की उच्चायुक्त हरिशोआ ललाटियाना अकाउचे भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने कहा भारतीय कला और संस्कृति को देखकर वह हैरान है, इसमें विचारों की इतनी गहनता है। 
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सुरताल महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंजना वेलफेयर सोसाइटी ने 12 वर्ष पूर्ण होने पर दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सुरताल महोत्सव का आयोजन किया । भारत विकास परिषद भी महोत्सव का हिस्सा बना। संस्था के अध्यक्ष मनीष कुलश्रेष्ठ ने बताया कि हमने विगत वर्षों में 150 से अधिक महोत्सव और 1000 से अधिक संगीत ,नृत्य , पेंटिंग्स की कार्यशाला आयोजित की। महोत्सव का मुख्य आकर्षण दिव्यांग विद्यार्थियों की प्रस्तुति थी, संस्था वर्कशॉप आयोजित कर इन बच्चों को सिखाती है।
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माया कुलश्रेष्ठ ने दी शानदार प्रस्तुति
महोत्सव के दौरान नृत्यम, गीतम, वादन पर आधारित कार्यक्रम में माया कुलश्रेष्ठ ने संस्कृति मंत्रालय के अधीन सीएफपीजी योजना के अंतर्गत 'भागवत गीता _ ए पोएटिक अप्रोच टू कृष्ण' की प्रस्तुति दी। माया अपने प्रयोगों के लिए जानी जाती है, माया ने रश्मिरथी और गीता के श्लोकों को गीतों में पिरोया और तीन ताल की बंदिशों के साथ वीर रस का समावेश किया। मृदंग और घटम की थाप ने उसे वीर रस से भर दिया। विधि शर्मा ने भक्ति गीत की प्रस्तुति दी। उन्होंने भक्ति काल की दिव्यता के अनुसार मिश्र राग पर रचित रचनाओं का चुनाव किया और वादन पर रोमन दास और घटम पर शोणुक बनर्जी, बांसुरी पर निखिल शर्मा ने जुगलबंदी की प्रस्तुति दी। इस जुगलबंदी में उत्तर भारत और दक्षिण भारत का अद्भुत संगम देखने को मिला ।

सुरताल महोत्सव में शामिल हुए देश भर के जाने माने कला, साहित्य के चेहरे 
लेखक और भाजपा के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी डॉ विजय चौथाईवाले ने कहा कि यह अंजना वेलफेयर सोसाइटी और माया कुलश्रेष्ठ की एक अच्छी पहल है। देखकर अच्छा लग रहा है कि भारत विकास परिषद भी इसमें उनके साथ आया। वरिष्ठ आईएएस और लेखक मनोज श्रीवास्तव ने संस्था को बारह वर्ष पूरे करने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि 12 वर्षों को हमारे यहां एक युग माना जाता है, तो इसका एक युग-चक्र पूरा हुआ। इन बारह वर्षों में आप सब लोगों ने अपने अथक परिश्रम और समर्पण के झंडे गाडे हैं। जैसे हमारी संस्कृति में बारह ज्योतिर्लिंग हैं, वैसे ही इन बारहों में से प्रत्येक वर्ष आपके लिए एक ज्योति-स्तंभ रहा है। अनाहत चक्र में कहते हैं 12 पांखुरी होती हैं और अनाहत चक्र हृदय में होता है। आपकी इस संस्था ने भी कला के माध्यम से हृदय तक पहुँचने का रास्ता चुना है। भाव, लय, सुर ताल का रास्ता।
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सुरताल महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
सेशेल्स की उच्चायुक्त भी कार्यक्रम में शामिल हुईं
सेशेल्स की उच्चायुक्त हरिशोआ ललाटियाना अकाउचे भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने कहा भारतीय कला और संस्कृति को देखकर वह हैरान है, इसमें विचारों की इतनी गहनता है। दिव्यांग जनों को कला के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए माया कुलश्रेष्ठ और उनके टीम को बधाई देते हुए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के पूर्व कुलपति प्रोफेसर के जी सुरेश ने कहा कि यह संपूर्ण समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार प्रसार में अंजना वेलफेयर सोसाइटी देश भर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों को नाट्यशास्त्र से संबंधित जानकारी प्रायोगिक रूप में प्रदान करेगी। उन्होंने मोबाइल फोन के नशे से प्रभावित युवा पीढ़ी को नृत्य, विशेष कर कथक के माध्यम से अपने विरासत और परंपराओं से जुड़ने का सुझाव भी दिया।
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surtaal mahotsav - फोटो : अमर उजाला
भारत विकास परिषद के संगठन मंत्री सुरेश जैन ने कहा कि भारत विकास परिषद दिव्यांग जनों , एवं समाज के पिछड़े वर्ग के लिए काम करती है। इसी तरह का कार्य अंजना वेलफेयर सोसाइटी द्वारा पिछले 12 वर्ष से किया जा रहा है जो की एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य है। कार्यक्रम में मशहूर फिल् आलोचक अजीत राय भी शामिल हुए। चित्रकला प्रदर्शनी भी समारोह का हिस्सा थी। नवल किशोर और नीरज शर्मा  के समूह द्वारा पेंटिंग्स इस समारोह का हिस्सा रहीं। सुरताल महोत्सव को सफल बनाने में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, इंडियन ऑयल, आईआईएफसीएल, गेल, एलआईसी, एनटीपीसी ने सहयोग दिया।
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