सार
आंध्र प्रदेश में पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी पर 3,200 करोड़ के शराब घोटाले में एसआईटी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में दावा है कि उन्होंने राज शेखर रेड्डी को शराब नीति बनाने की इजाजत दी थी, जिससे हर महीने 60 करोड़ की रिश्वत वसूली होती थी।
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने कासिरेड्डी राज शेखर रेड्डी को कल्याणकारी योजनाओं और अपनी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के लिए पैसा उगाहने को शराब नीति तैयार करने की इजाजत दी थी। राज शेखर जगन के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान हुए कथित 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में मुख्य आरोपी है।
विशेष जांच दल (एसआईटी) के एक अधिकारी ने राज शेखर की रिमांड रिपोर्ट में यह दावा किया। हालांकि वाईएसआर कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि मौजूदा राजग सरकार पार्टी नेताओं के खिलाफ राजनीति से प्रेरित शराब घोटाले का आरोप लगा रही है और इसे प्रचारित करने के लिए मीडिया का सहारा ले रही है।
एसआईटी ने रिमांड रिपोर्ट में कहा कि पूछताछ के दौरान राज शेखर रेड्डी ने कबूल किया कि तत्कालीन सीएम जगन मोहन रेड्डी ने उन्हें एक आबकारी नीति तैयार करने की अनुमति दी थी, जिससे राज्य के लिए अधिक राजस्व पैदा हो सके और सरकार एक तरफ कल्याणकारी उपायों के लिए इसका उपयोग कर सके तथा दूसरी तरफ पार्टी फंड प्राप्त कर सके। ब्यूरो
प्रति महीने 60 करोड़ रुपये की रिश्वत वसूली जाती थी
विजयवाड़ा की एक स्थानीय अदालत में पेश की गई रिमांड रिपोर्ट में कहा गया है कि रेड्डी (जो कथित तौर पर जगन मोहन रेड्डी के आईटी सलाहकार के रूप में काम करता थे) ने अन्य व्यक्तियों के साथ लोकप्रिय शराब ब्रांड को बंद करने और ‘ब्लू-आइड ब्रांड्स’ (पसंदीदा ब्रांड्स) को बढ़ावा देने के लिए काम किया। एसआईटी के अनुसार, कथित तौर पर प्रति माह 60 करोड़ रुपये तक की रिश्वत वसूली जाती थी। रिपोर्ट में अन्य व्यक्तियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी धनुंजय रेड्डी भी शामिल हैं।