आंध्र प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की किल्लत की खबरों ने कई शहरों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। विजयवाड़ा, गुंटूर, राजमुंद्री, कुरनूल और नेल्लोर जैसे शहरों में हालात ऐसे हो गए कि लोगों को घंटों लाइन में लगकर ईंधन लेना पड़ा। कई पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म के बोर्ड लगा दिए गए, जिससे वाहन चालकों और कर्मचारियों के बीच बहस और झड़प की स्थिति भी बन गई। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल तिरुमाला में भी इसका असर देखने को मिला, जहां दो पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो गया और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। कई लोगों ने बताया कि उन्हें अपनी बाइक में पेट्रोल भरवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
अब समझिए क्यों आई यह समस्या?
सूत्रों के मुताबिक, वीकेंड के दौरान सोशल मीडिया पर कई अफवाहें फैलने लगीं कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध बढ़ सकता है, जिससे ईंधन की कमी हो जाएगी। इन खबरों से घबराकर लोगों ने जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल खरीदना शुरू कर दिया। कई जगहों पर हजारों लोग पेट्रोल पंपों के बाहर जमा हो गए, जिससे अचानक मांग बहुत बढ़ गई और सप्लाई पर दबाव पड़ गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि रविवार तक जो पेट्रोल पंप बंद हुए, उनमें से ज्यादातर में ईंधन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था, बल्कि पैनिक बाइंग को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर पंप बंद किए गए थे।
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अंतरराष्ट्रीय कारणों की भी बड़ी भूमिका, समझिए कैसे?
इस पूरी स्थिति के पीछे एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय हालात भी बताए जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से जारी तनाव के कारण दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। सामान्य स्थिति में दुनिया के करीब 20% तेल का व्यापार इसी रास्ते से होता है। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, और इसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। ऐसे में इस रास्ते पर असर पड़ने से ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ जाती है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। सरकार वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने की कोशिश कर रही है और लोगों से अपील कर रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर खरीदारी न करें, ताकि स्थिति सामान्य बनी रहे।