तिरंगे के प्रति हर देशवासी के मन में सम्मान और आदर का भाव होता है। यदि हम आपको बताएं कि एक शख्स ने इसके लिए अपना घर तक बेच दिया है तो शायद आपको विश्वास नहीं होगा। मगर आंध्र प्रदेश के रहने वाले आर सत्यानारायण ने ऐसा कर दिखाया है। वह पेशे से बुनकर हैं।
उनका सपना था कि वह बिना किसी सिलाई या जोड़ के सिंगल कपड़े पर तिरंगे को तैयार करें। अपने सपने के तिरंगे को तैयार करने के लिए उन्हें जब साढ़े छह लाख रुपये की जरूरत महसूस हुई तो उन्होंने पश्चिमि गोदावरी के वेमावरम गांव में स्थित अपने घर को बेच दिया और किराए के घर में रहने लगे।
उन्होंने आखिरकार 8x12 फुट का तिरंगा तैयार किया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि देश में सिंगल कपड़े पर बना हुआ एक भी तिरंगा मौजूद नहीं है क्योंकि केसरिया, हरे और सफेद रंग की पट्टियों को सीलकर जोड़ा जाता है। सत्यनारायण ने सातवीं तक पढ़ाई की है। वह अपने सपने को और आगे ले जाते हुए इसे लाल किले पर फहराते हुए देखना चाहते हैं।
हाल ही में विशाखापट्टनम रैली के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि मोदी ने इस अनूठे तिरंगे को देखा या नहीं।' उन्हें इस तिंरगे के अनूठे पहलू के बारे में प्रधानमंत्री को बताने का मौका नहीं मिला। सत्यनारायण ने कहा कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि तिरंगे को बुनना इतना महंगा होगा।
उन्होंने कहा, जब मैंने इसे शुरू किया तो मुझे लगा कि इसके लिए केवल 25,000 रुपयों की जरूरत होगी। शुरुआत में उन्होंने बुनकर 4x6 फुट का झंडा तैयार किया था। उन्होंने कहा, 'मुझे बाद में इंटरनेट के जरिए पता चला कि लाल किले पर 8x12 फीट का तिरंगा फहराया जाता है।'
इस तिरंगे के खर्च को पूरा करने के लिए उन्होंने अपना पैतृक घर बेच दिया और साढ़े छह लाख रुपये तिरंगे को बुनने में लगा दिए। जिसमें उन्हें चार साल के करीब का समय लगा। जब उनसे पूछा गया कि ऐसा तिरंगा बनाने के लिए उन्हें प्रेरणा कहां से मिली तो उन्होंने कहा कि मैंने एक शॉर्ट फिल्म लिटिल इंडियंस देखी थी जिसमें अभिनेता तीन रंगों को साथ में सिल देता है और उसपर अशोक चक्र रंग देता है।
उन्होंने कहा, 'तब मैंने निर्णय लिया कि बिना सिले झंडा बनाउंगा। अशोक चक्र बनाने के लिए मैंने रंग-बिरंगे धागों का इस्तेमाल किया। झंडे को तैयार करने में आई परेशानियों का मैंने सामना किया।'