सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें सरकारी इमारतों और पंचायत भवनों से राजनीतिक दलों खासकर सत्ताधारी वाईएसआरसीपी के रंग हटाने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।
शीर्ष अदालत ने साथ ही राज्य सरकार को इन इमारतों पर फिर से रंग रोगन कराने का निर्देश दिया। जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस कृषण मुरारी और जस्टिस एस रविंद्र भट की पीठ इस मसले पर राज्य सरकार की दलील से संतुष्ट नहीं हुई और अपील को ठुकरा दिया।
राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता जी एन रेड्डी ने बताया कि शीर्ष अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव, पंचायती राज के प्रमुख सचिव और आंध्र प्रदेश के पंचायती राज तथा ग्रामीण विकास आयुक्त को राहत प्रदान करते हुए उनके खिलाफ उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गई अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी।
राज्य सरकार का दावा था कि उच्च न्यायालय ने पंचायत भवन सहित सरकारी इमारतों के रंग-रोगन के लिए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की सरकार के दिशानिर्देशों से संबंधित 23 अप्रैल के शासकीय आदेश को गलत तरीके से निरस्त कर दिया है।
राज्य सरकार ने इस शासकीय आदेश को निरस्त करने और ग्राम पंचायतों के भवनों से चुनिन्दा रंग हटाने के बारे में उच्च न्यायालय के आदेश का कथित रूप से पालन नहीं करने के कारण मुख्य सचिव और अन्य के खिलाफ स्वत: ही अवमानना की कार्यवाही के आदेश को चुनौती दी थी।
रेड्डी ने बताया कि यद्यपि सरकार की अपील खारिज कर दी गई लेकिन न्यायालय ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमाानना की कार्यवाही बंद कर दी है।
उच्च न्यायालय ने मार्च के महीने में आदेश दिया था कि 10 दिन के भीतर ग्राम पंचायत के भवनों से नीला, हरा और सफेद रंग हटाया जाए लेकिन राज्य सरकार ने ऐसा करने की बजाय उसमें टेरा कोटा जोड़ दिया, जिससे सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की पहचान की जा सके।