राजधानी अमरावती को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। आंध्र सरकार की ओर से कोर्ट में उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत अमरावती को राज्य की एकमात्र राजधानी घोषित किया गया था।
आंध्र प्रदेश सरकार ने अमरावती को राज्य की एकमात्र राजधानी घोषित करने वाले हाईकोर्ट के तीन मार्च के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। तीन राजधानियों की अपनी योजना को पुनर्जीवित करने के उद्देश से राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
दरअसल, राज्य सरकार ने राज्य की तीन राजधानियां बनाने की योजना बनाई थी।अमरावती को विधायी, विशाखापत्तनम को कार्यकारी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी बनाने की योजना है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में तीन मुख्य मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है।
अपील में कहा गया है कि संविधान के संघीय ढांचे के तहत प्रत्येक राज्य को यह निर्धारित करने का एक अंतर्निहित अधिकार है कि उसे अपने कार्यों को कहां से करना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया है कि यह मानना है कि राज्य को अपनी राजधानी पर निर्णय लेने की शक्ति नहीं है, यह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट का निर्णय शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन है क्योंकि यह विधायिका को इस मुद्दे को उठाने से रोकता है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने माना था कि राज्य विधायिका के पास राज्य की राजधानी पर कोई कानून बनाने की कोई शक्ति नहीं है और राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह वर्तमान राजधानी अमरावती से किसी भी कार्यालय को स्थानांतरित न करे।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने दी थी सफाई
इससे पहले आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर खींचतान के बीच केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने साफ कर दिया था कि फिलहाल अमरावती ही इसकी राजधानी रहेगी। उन्होंने राज्यसभा को बताया था कि राज्य सरकार ने तीन शहरों को राजधानी बनाने के प्रस्ताव को वापस ले लिया है।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह भी बताया था कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच संपत्ति का बंटवारा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून के अनुरूप होगा। केंद्र सरकार इसमें समन्वय एजेंसी के रूप में काम करेगी।