प्रधानमंत्री रहते अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की प्रमुख नदियों को जोड़ने का सपना देखा था। इरादा था देश के बड़े भू-भाग को सूखे और बाढ़ से बचाना। पूर्व पीएम के इस सपने को आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू ने न सिर्फ अपनाया बल्कि एक साल के रिकार्ड समय में गोदावरी और कृष्णा नदियों को जोड़कर साउथ के संगम का निर्माण भी कर दिया। लाखों एकड़ जमीन की प्यास बुझाने में सक्षम इस प्रोजेक्ट को हाल ही में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में शामिल किया गया है।
दरअसल, मुख्यमंत्री ने गोदावरी के पानी को रॉयलसीमा इलाके में खुशहाली लाने के अस्त्र के रूप में देखा। नया राज्य बनते ही उन्होंने गोदावरी को कृष्णा नदी से जोड़कर ऐसी सिंचाई परियोजना तैयार करने पर काम शुरू किया जो राज्य को सूखे के दंश से बचा सके।
आंध्र प्रदेश सरकार ने महज एक साल में पत्तीसीमा लिफ्ट स्कीम पूरी कर गोदावरी नदी से 8500 क्यूसिक पानी कृष्णा नदी को देना शुरू कर दिया है। नतीजतन, गोदावरी का पानी बेकार बहकर समुद्र में जाना बंद हो गया और कृ ष्णा नदी पूरे साल पानी से लबालब रहने लगी। साथ ही, आंध्र प्रदेश सरकार ने दक्षिण की दोनों बड़ी नदियों के संगम स्थल को पवित्र संगमम के नाम से सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी के रूप में भी विकसित कर दिया है। यहां हर साल बारी-बारी से गोदावरी और कृष्णा कुंभ का आयोजन भी होने लगा है।
''देश में पहली बार दो बड़ी नदियों को आपस में जोड़कर लाखों एकड़ फसल को सूखे की मार से बचाने का सफल प्रयोग आंध्र प्रदेश ने किया है। पवित्र गंगा का नाम लिए बिना संगम पूरा नहीं होता है। इसलिए साउथ के संगम यानी पोलावरम परियोजना से निकाली गईं चार नहरों में से एक का नाम तेलगू गंगा रखा गया है।''
एन. चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश