आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू की याचिका पर विजयवाड़ा एसीबी कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। उन्होंने विजयवाड़ा एसीबी कोर्ट में, उनकी गिरफ्तारी में शामिल आंध्र प्रदेश पुलिस CID अधिकारियों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) की मांग की थी।
आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू की याचिका पर विजयवाड़ा की अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। नायडू ने कौशल घोटाला मामले में उनकी गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड मुहैया कराने की मांग की है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) कोर्ट ने उनकी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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बता दें कि इस मामले में सीआईडी ने पहले ही नायडू की याचिका पर जवाब दाखिल कर दिया था। अपने जवाब में सीआईडी के वकीलों ने तर्क दिया कि जब तक अदालत सीडीआर याचिका पर निर्णय नहीं ले लेती, तब तक अधिकारियों की सूची नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि नायडू को पहले सीडीआर का अधिकार मिलना चाहिए उसके बाद ही अधिकारियों की सूची का सवाल उठता है।
इस बीच, आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की अवकाश पीठ के न्यायाधीश वेंकट ज्योतिर्मयी प्रताप ने शुक्रवार को कौशल विकास निगम घोटाला मामले में पूर्व सीएम की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उनके सुनवाई से खुद को अलग करने के बाद याचिका पर अब मुख्य न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर के पास लंबित है। वह निर्णय करेंगे किकौन सी पीठ इस पर सुनवाई करेगी।
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आंध्र प्रदेश के सरकारी खजाने को 371 करोड़ का चूना लगा?
बता दें, 73 वर्षीय नायडू पर 2015 में मुख्यमंत्री रहने के दौरान कौशल विकास निगम से धन का कथित दुरुपयोग का आरोप लगा है। आरोपों के आधार पर नायडू को नौ सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। सरकार का आरोप है कि नायडू के कथित दुरुपयोग के कारण राज्य के खजाने को 371 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। पूर्व मुख्यमंत्री फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और आंध्र प्रदेश की राजामहेंद्रवरम केंद्रीय जेल में बंद हैं।