सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आंध्र प्रदेश सरकार की उस याचिका पर किसानों, उनके संघों और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य की विधायिका के पास राजधानी अमरावती को स्थानांतरित करने, विभाजित करने या तीन भागों में बांटने के लिए कानून की शक्ति नहीं है.
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट 'टाउन प्लानर' या 'इंजीनियर' नहीं हो सकता है। हाईकोर्ट सरकार को निर्देश नहीं दे सकता है कि छह महीने के भीतर राजधानी शहर बनना चाहिए। जस्टिस के. एम. जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा जारी उन निर्देशों पर भी रोक लगा दी है, जिनमें कहा गया था कि राज्य छह महीने के भीतर शहर अमरावती और राजधानी क्षेत्र का निर्माण और विकास करेगा।
हाईकोर्ट ने सरकार और उससे जुड़े अधिकारियों को एख महीने के भीतर राजधानी अमरावती शहर और क्षेत्र में सड़क, जल निकासी, बिजली व पेयजल आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे के विकास को पूरा करने का आदेश दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे इस मुद्दे पर विस्तार से जांच करने की जरूरत है और 31 जनवरी को आगे की सुनवाई की जाएगी।