अंडमान निकोबार अक्सर सुर्खियों में तब आता है जब वहां या तो सुनामी आई हो या फिर भूकंप। लेकिन इस बार अंडमान निकोबार अपने स्वच्छता अभियान की वजह से चर्चा में है। जब पूरा देश 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत अभियान का 3 साल मना रहा था और गांधी जयंती मना रहा था तब अंडमान निकोबार द्वीप समूह सचमुच गांधी और भारत के स्वच्छ होने के सपने को अमली जामा पहनाने में जुटा था।
पोर्ट ब्लेयर म्यूनिसिपल काउंसिल (पीबीएमसी) से आम नागरिकों के साथ मिलकर स्वच्छ भारत अभियान और महात्मा गांधी के स्वच्छता सत्याग्रह के लिए हाथ मिलाया ही नहीं है बल्कि काम भी शुरू कर दिया है।
पीबीएमसी ने 2016 में शहर में एक सर्वे किया था जिससे पता चला कि खुले में शौच अक्सर गांवों और रिमोर्ट एरिया में होता है। अंडमान की जनसंख्या 1.59 लाख है। सर्वे में पता चला कि 7000 लोगों के पास टॉयलेट नहीं है जबकि 1600 लोगों के घरों में टॉयलेट की सुविधा नहीं है।
सरकार ने सर्वे करने के बाद जिन लोगों के घर में बाथरूम नहीं था उन्हें 14000 रुपए दिए। वहीं 48 ऐसे क्षेत्रों का चयन कर जहां खुले में शौच करने जाते थे वहां 256 कम्यूनिटी टॉयलेट बनवाया। अधिकारी ने बताया कि म्यूनिसिपल को 2.5 करोड़ सेंक्शन किया गया था। और अब अंडमान निकोबार पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त द्वीप बन चुका है।