उड़ीसा के मयूरभांज जिले में एक दंपती के एक साल के बेटे की मृत्यु हो गई। दंपती ने आरोप लगाया है कि एंबुलेंस के चालक ने लंच ब्रेक काफी लंबा ले लिया था और बच्चे को तुरंत मेडिकल की जरूरत थी। परिवार वालों ने कहा कि एंबुलेंस चालक ने खाना खाने के लिए समय ज्यादा ले लिया, जिस कारण उनके बच्चे की मौत हो गई।
निरंजन बेहरा और गीता बेहरा के एक साल के बच्चे को बारिपदा के पीआरएम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्चे में डायरिया जैसे लक्षण दिखने के बाद उसे अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया था। हालांकि पीआरएम अस्पताल ने बच्चे की हालत को देखते हुए उसे एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती के लिए रेफर कर दिया।
परिवार वालों को जल्द ही एक एंबुलेंस करा दी गई, जिसमें वो नवजात और उसके माता-पिता थे और एंबुलेंस एससीबी अस्पताल के लिए निकल पड़ी लेकिन रास्ते में एंबुलेंस चालक और फार्मासिस्ट ने खाना खाने का निश्चय किया। परिवार ने बताया कि दोनों ने वादा किया था कि वो जल्द वापस आ जाएंगे।
एंबुलेंस में एक घंटे इंतजार करने के बाद बच्चे के पिता निरंजन बेहरा ढाबे के अंदर गए जहां वो दोनों बैठकर खाना खा रहे थे। हालांकि उन दोनों ने निरंजन से कहा था कि वो बच्चे की स्थिति से अवगत हैं। वो दोनों लगभग 90 मिनट के बाद आए लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।
मृतक बच्चे के मामा परमानंद बेहरा ने कहा कि अगर चालक और फार्मासिस्ट लंबा ब्रेक नहीं लेते तो शायद हम बच्चे को बचा लेते। एंबुलेंस ने कटक की ओर जाना शुरू किया लेकिन तब तक बच्चे की हालत नाजुक हो चली थी और बारिपदा से दस किलोमीटर दूर कृष्णाचंद्रपुर में बच्चे ने दम तोड़ दिया।
बच्चे को कृष्णाचंद्रपुर कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में भर्ती किया गया, जहां डॉक्टर ने बच्चे के मृत होने की बात कही।
हालांकि जिक्विटजा हेल्थकेयर लिमिटेड के जिला समन्वयक सायन बोस, जो 108 एंबुलेंस का भी संचालन करते है, उन्होंने चालक की ओर से होने वाली किसी भी प्रकार की देरी का खंडन किया। सायन बोस ने कहा कि वो दोनों लंच करने जरूर गए थे लेकिन 20 मिनट में ही आ गए थे।