साल 2016-17 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की टॉप 100 कंपनियों द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायतों की संख्या में लगभग 12 फीसदी की बढोतरी दर्ज की गई है।
हालांकि कुछ कंपनियों ने इस बारे में कम मामलों की जानकारी दी है, जबकि विप्रो, आईसीआईसीआई बैंक, इन्फोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी अन्य कंपनियों ने इस साल के दौरान 50 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं। मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़े आंकडे से चिंतित होने की कोई बात नहीं है क्योंकि ऐसे मामले कंपनी की आतंरिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और मजबूत करने की ओर इशारा करता है।
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उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों को पहले सार्वजनिक रूप से कभी नहीं बताया गया था बल्कि उन्हें दबा दिया जाता था। ऐसे आंकड़ों की रिपोर्ट करने वाली ज्यादातर कंपनियां कार्यस्थल पर (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत महिलाओं के यौन उत्पीड़न के प्रति जागरूकता और अनुपालन का निर्देश देती है। बताते चलें कि आईटी कंपनी विप्रो साल 2016-17 के दौरान 116 यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज किए हैं जोकि पिछले साल 111 थे, जिनमें से 102 मामलों में उचित कार्रवाई की गई थी।
वहीं दूसरी तरफ आईसीआईसीआई बैंक में,साल 2016-17 में 95 मामले दर्ज किए गए थे। इसके अलावा इंफोसिस में 88 मामले, जिनमें 72 मामलों को अनुशासनात्मक कार्यवाही करके निपटारा किया गया, जबकि पांच मामलों को समझौता करके हल किया गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मामले में संस्थापक और निर्देशक विशाल केडिया ने कहा कि अलग-अलग आंकड़ों के आधार पर कंपनी के मूल्यों का मूल्यांकन करना मुश्किल है। उन्होंने आगे कहा कि जिन कंपनियों की बड़ी संख्या में शिकायतें हैं उन्हें नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि उनके पास मामलों के निपटान के लिए एक मजबूत प्रणाली है।