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सबरीमाला मंदिर: हिंसक विरोध के बाद लाठीचार्ज के बीच खुले कपाट, धारा 144 लागू

Wed, 17 Oct 2018 09:37 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Sabrimala Temple dispute
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भारी विरोध प्रदर्शन के बीच सबरीमाला मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं। इस दौरान पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करनी पड़ी। जिसके बाद कुछ हिस्सों में धारा 144 लगाई गई। लाठीचार्ज के दौरान कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल भी हो गए हैं। जबकि कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। कपाट खुलने के बाद पारंपरिक तरीके से पूजा और आरती की गई है। भक्त साढ़े दस बजे तक भगवान अयप्पा के दर्शन करेंगे। 

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बता दें कि सबरीमाला मंदिर में रजस्वला लड़कियों और महिलाओं के प्रवेश का महिलाएं ही विरोध कर रही हैं। इसको लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया है, जिसको देखते हुए प्रशासन ने भी पूरी तैयारी की हुई है। मंदिर के आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। सबरीमाला मंदिर जाने वाले रास्ते पर लाठी चार्ज किया गया है। जिसमें कई पुलिसकर्मी और अन्य लोग घायल हो गए हैं। वहीं प्रदर्शनकारियों ने पत्रकारों पर भी हमला कर दिया है। जिसके बाद पुलिस पत्रकारों को अपनी गाड़ी से सुरक्षित स्थान पर ले गई है।  

मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे करीब 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मंगलवार को 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि आज (बुधवार) 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी पम्बा में हुई है। हालांकि इनमें से दो लोगों को बेल भी मिल गई है।   
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वहीं, कांग्रेस के नेता भी निलाक्कल में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच खबर आ रही है कि भगवान अय्यप्पा के दर्शन करने आ रही एक महिला माधवी भारी विरोध के बाद अपने परिवार सहित बीच रास्ते से ही वापस लौट गई है।  

वहीं, इस मामले पर भाजपा नेता उदित राज का कहना है, 'दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है और यह काफी दिलचस्प भी है। 'मुझे गुलाम बनाओ, मेरे साथ असमान रूप से व्यवहार करो, हम पुरुषों से कम हैं', महिलाएं ही महिलाओं को रोक रही हैं। इसमें क्या बात है? मुझे नहीं पता कि इस देश में क्या हो रहा है।' हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह उनकी निजी राय है, राजनीतिक नहीं। 

प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस द्वारा हल्का बल प्रयोग भी किया गया है, जिससे मंदिर जाने के मुख्य रास्ते निलाक्कल में बुधवार की सुबह माहौल तनावपूर्ण हो गया। सबरीमाला पहाड़ी से करीब 20 किलोमीटर दूर निलाक्कल में बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे समूह 'सबरीमाला आचार संरक्षण समिति' के तंबू आदि भी हटा दिए हैं।

अयप्पा स्वामी मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे कुछ श्रद्धालू धरना दे रहे हैं और अय्यप्पा मंत्र का जाप कर रहे हैं। बुधवार तड़के जब प्रदर्शनकारियों ने मंदिर तक जाने के मुख्य रास्ते पर बसों को रोकने का प्रयास किया तो पुलिस को उनके खिलाफ बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस की कार्रवाई शुरू होते ही वहां बेहद कम संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारी भाग निकले।

मासिक पूजा के लिए मंदिर खुलने से कुछ घंटे पहले पुलिस ने कहा कि वह किसी को भी लोगों के आने-जाने में अवरोध पैदा नहीं करने देंगे। निलाक्कल का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथों में लेते हुए पुलिस ने अय्यप्पा मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के रास्ते में अवरोध पैदा करने वालों को चेतावनी दी। 

प्रदर्शनकारियों में से कुछ ने पम्बा जाने वाले वाहनों को जांचा और उनमें सवार 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर जाने से रोक दिया, इस पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की। सबरीमाला आचार संरक्षण समिति के कार्यकर्ताओं ने सोमवार की रात तमिलनाडु से पम्बा जा रहे 45 और 40 वर्ष आयु के दंपति को केएसआरटीसी के बस से कथित रूप से उतरने को बाध्य कर दिया था। हालांकि, दंपति का कहना है कि वह सिर्फ पम्बा तक जाएंगे और सबरीमाला पहाड़ी पर नहीं चढ़ेंगे। बाद में पुलिस उन्हें सुरक्षित ले गई। 
 

निलक्कल में मौजूद सबरीमाला आचार संरक्षण समिति के कुछ कार्यकर्ताओं ने मीडियाकर्मियों को भी कथित रूप से उनका काम करने से रोका था। हालांकि, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के बाद सभी मीडियाकर्मी निलक्कल लौट आए हैं।

भगवान अय्यप्पा स्वामी मंदिर जाने के मुख्य रास्ते निलाक्कल पर महिला पुलिसकर्मियों सहित करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इस बीच पम्बा में श्रद्धालुओं के एक अन्य समूह ने गांधीवादी तरीके से अपना विरोध जताया।

बता दें कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अय्यप्पा स्वामी मंदिर के दरवाजे पहली बार बुधवार की शाम खुलने वाले हैं। पांच दिन की मासिक पूजा के बाद यह 22 अक्तूबर को फिर बंद हो जाएंगे। 

महिला ने किया आत्महत्या का प्रयास 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर रही एक महिला ने मंगलवार को खुलेआम फांसी लगाने का प्रयास भी किया। महिला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी है, जो उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। महिला ने कहा कि वो लोग इस खिलवाड़ को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। 

मुख्यमंत्री ने दी कार्रवाई की चेतावनी

मुख्यमंत्री पी. विजयन ने विरोध कर रहे लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी श्रद्धालुओं का रास्ता रोकेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि सरकार पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हर हाल में लागू करेगी। 
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सुब्रमण्यम स्वामी ने ये कहा

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सबरीमाला मामले पर बोलते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है, लेकिन अब आप कह रहे हैं कि यह हमारी परंपरा है। तीन तलाक भी इसी तरह की परंपरा है, जब इसे खत्म कर दिया गया तो सब लोग प्रशंसा कर रहे थे। वही हिंदू अब सड़कों पर आ गए हैं।' 

उन्होंने कहा, 'यह पुनरुत्थान और रूढ़िवाद के बीच की लड़ाई है। पुनरुत्थान का कहना है कि सभी हिंदू बराबर हैं और जाति व्यवस्था को समाप्त किया जाना चाहिए। क्योंकि आज कोई भी ब्राह्मण केवल बौद्धिक नहीं है, वो सिनेमा जगत में भी है और व्यवसाय में भी है। यह कहां लिखा गया है कि जाति जन्म से होती है? शास्त्रों में संशोधन किया जा सकता है।' 
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