आईबी इंस्पेक्टर राजन शर्मा के मामले की पैरवी करने वाले वकील सरदार मुकेश सैनी बताते हैं कि 1998 में कश्मीरी आतंकी के एएमयू में छिपे होने के इनपुट पर उनको मौखिक आदेश देकर हबीब हाल के पास तैनात किया गया था। इसी दौरान कुछ छात्र राजन शर्मा को बलपूर्वक हबीब हाल के अंदर खींच ले गए। विरोध करने पर राजन शर्मा को कपड़े फाड़ कर बर्फ पर लिटा दिया गया। उनका जबड़ा और हाथ-पैरों की हड्डियां तोड़ दी गईं। पीठ पर नुकीली चीज से ‘अल्लाह’ गोद दिया गया। उनके हाथ के नाखून खींच लिए गए थे। दो दिन बाद पुलिस ने राजन शर्मा को मुक्त कराया। काफी इलाज के बाद भी वे सामान्य नहीं हो सके। नौकरी के अंतिम समय में उनकी बहाली मेरठ में हुई, लेकिन इसी दौरान उनकी मौत हो गई।
अफजल गुरु की फांसी पर हुआ था विरोध प्रदर्शन
संसद पर हुए हमले के आरोपी अफजल गुरु को फरवरी 2013 में फांसी देने के बाद एएमयू में इसके विरोध में कश्मीरी छात्रों ने जमकर धरना-प्रदर्शन किया। इसमें भारत सकार विरोधी और कश्मीर की आजादी के नारे लगाए। उसके लिए मौलाना आजाद लाइब्रेरी के लान में नमाज-ए-गायबाना पढ़ी गई।
उड़ी में शहीद जवानों पर की थी अभद्र टिप्पणी
सितंबर, 2016 में कश्मीर के उड़ी सेक्टर में आतंकी हमले में 18 जवानों के शहीद होने पर एएमयू में पढ़ रहे कश्मीरी छात्र मुदस्सिर ने शहीद जवानों के लिए सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी की। इसके बाद एएमयू प्रशासन ने मुदस्सिर को निष्कासित कर दिया था।
आतंकी गतिविधि में शामिल होने के आरोपी एएमयू के शोध छात्र मन्नान बशीर वानी के हबीब हाल स्थित कमरे में तलाशी के दौरान पुलिस को अन्य सामान के अलावा धार्मिक पुस्तकें और उकसाने वाली कट्टरपंथी लिखित सामग्री भी मिली है। पुलिस इन सभी की जांच कर रही है।
गृह मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद एसएसपी राजेश कुमार पांडे, एडीएम सिटी श्याम बहादुर सिंह, एसपी सिटी अतुल कुमार श्रीवास्तव, प्राक्टर प्रो. मोहसिन के साथ हबीब हाल पहुंचे। पूरे तलाशी अभियान की वीडियोग्राफी करायी गई।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि मन्नान के कमरे से जो सामग्री मिली है उसमें रोजमर्रा के सामान के अलावा धार्मिक पुस्तकें, उकसावे वाली कट्टरपंथी लिखित सामग्री है। सभी सामान की सूची बनाकर सामान पुलिस ने अपनी सुपुर्दगी में ले लिया है। इसके बाद कमरे को सील कर दिया गया।
आतंकी गतिविधि में शामिल होने के आरोपी एएमयू शोध छात्र का प्रकरण सामने आने के बाद यूपी एटीएस की एक टीम ने अलीगढ़ में डेरा डाल दिया है। जबकि एक टीम अन्य शहरों में जाकर मन्नान वानी के कनेक्शन की तलाश कर रही है। अलीगढ़ में मन्नान और उससे जुड़े सभी लोग रडार पर आ गए हैं।
मन्नान ने छात्र संघ के प्रत्याशियों को चुनाव भी लड़ाया है। वह भी एटीएस की जांच के दायरे में है। प्राथमिक तौर पर पता चला है कि एक साल पहले भी मन्नान को लेकर विवादित बातें सामने आयी थीं, लेकिन उस समय मामला दब गया था।
यूपी एटीएस की जिस टीम ने अलीगढ़ में डेरा डाला है वह टीम जानकारी कर रही है कि मन्नान अलीगढ़ में किन लोगों के संपर्क में रहता था। किन के साथ ज्यादा समय गुजारता था। किन-किन जगहों पर जाता था। किन-किन जगहों पर खाना खाता था। इसके अलावा वह किन शहरों में कब कब गया। अलीगढ़ से कश्मीर कितनी बार गया और कब-कब गया। किन शिक्षकों के संपर्क में कब-कब आया।
इसके अलावा यूपी एटीएस यह भी जानकारी करने की कोशिश कर ही है कि वह क्या कारण थे जिसके बाद मन्नान का झुकाव पृथकतावादी गतिविधियों की ओर हो गया। यूपी एटीएस की प्राथमिकता इस बात को जानने की भी है कि मन्नान के कश्मीरी साथियों ने अब आकर ही उसके संबंध में सूचना दिल्ली स्थित सुरक्षा एजेंसियों को क्यों दी? इससे पहले उसके कश्मीरी साथियों ने उसे समझाने का प्रयास किया तो वह क्यों उनकी बात नहीं माना। यह सभी तथ्य एटीएस की प्राथमिकता सूची में हैं।