आम्रपाली समूह के हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में अपना पैसा फंसा बैठे करीब 43 हजार निवेशकों के लिए खुशखबरी है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऋण वसूली पंचाट (डीआरटी) को आम्रपाली की कुछ संपत्तियां बेचने की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। इससे मिली रकम एनबीसीसी को देकर अधूरे पड़े प्रोजेक्ट पूरा कराए जाएंगे। एनबीसीसी ने इसके लिए करीब 8500 करोड़ रुपये के खर्च की संभावना शीर्ष अदालत के सामने जताई थी।
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने बुधवार को कहा कि हम चाहे तो आम्रपाली की सभी संपत्तियों को बेच सकते हैं, लेकिन यह समाधान नहीं है। प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए 1000 करोड़ रुपये की शुरुआती जरूरी रकम का जुगाड़ जरूर होगा, यह तय है। हम फिलहाल जड़ पर हैं न कि शाखाओं को काटने पर। हम चाहते हैं कि लोगों को फ्लैट मिले। साथ ही शीर्ष अदालत ने मौखिक रूप से यह टिप्पणी भी की वह प्रोजेक्टों के खरीदारों को भी बकाया रकम (अब तक का) जमा करने के लिए कहा जा सकता है।
इन तीन प्रोजेक्टों की संपत्ति बिकेगी
पीठ ने आम्रपाली के तीन प्रोजेक्टों सेंचुरियन पार्क, लेजर वैली और ड्रीम वैली की गैरविवादित संपत्तियां और कुछ कामर्शियल संपत्तियों को बेचने के लिए डीआरटी के अधिकारी धर्मेंद्र सिंह राठौर को नियुक्त किया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली को 25 सितंबर तक डीआरटी अधिकारी को संपत्तियों का विवरण व कागजात मुहैया कराने के लिए कहा है।
मिल सकता है इतना पैसा
1590 करोड़ रुपये का इंतजाम हो सकता है तीनों प्रोजेक्टों की बिना बिकी संपत्ति बेचकर
428 करोड़ रुपये मिल सकते हैं समूह की व्यवसायिक संपत्तियों को बेचने के बाद