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अध्ययन: समुद्र में माइक्रोप्लास्टिक बने ‘खतरनाक वाहक’, एंटीबायोटिक-रोधी बैक्टीरिया तेजी से फैला रहे

Sat, 29 Nov 2025 06:49 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क

सार

एक नए अध्ययन ने चेताया है कि समुद्र और नदियों में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक अब सिर्फ प्रदूषण नहीं, बल्कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) बैक्टीरिया के खतरनाक वाहक बन चुके हैं। पॉलिस्टिरिन और नर्डल्स जैसे प्लास्टिक कण एंटीबायोटिक्स को बेअसर कर बायोफिल्म बनाते हैं, जिससे रोगजनक बैक्टीरिया पानी और खाद्य शृंखला में तेजी से फैलते हैं। 

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ई कोलाई बैक्टीरिया - फोटो : freepik.com
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विस्तार
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समुद्र और नदियों में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक केवल प्रदूषण का कारण नहीं, बल्कि रोगजनक और रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटिमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस-एएमआर) बैक्टीरिया के प्रसार के खतरनाक वाहक भी बन चुके हैं। पॉलिस्टिरिन और नर्डल्स जैसे प्लास्टिक कण एंटीबायोटिक्स को बेअसर करने और बायोफिल्म के निर्माण को बढ़ावा देते हैं, जिससे एएमआर बैक्टीरिया सुरक्षित रहकर पानी और खाद्य शृंखला के माध्यम से फैलने की क्षमता हासिल कर लेते हैं।

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सीवर से समुद्र तक, अस्पताल के गंदे पानी से लेकर समुद्री वातावरण तक माइक्रोप्लास्टिक पर पैथोजन्स और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की खोज शीर्षक वाले इस अध्ययन का नेतृत्व प्लायमाउथ मरीन लैबोरेटरी और यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के शोधकर्ताओं ने किया। इसके तहत पांच प्रकार की सतहों बायो-बीड्स,नर्डल्स,पॉलिस्टिरिन, लकड़ी और कांच को नदी और समुद्री पानी में दो महीने तक स्थापित किया गया। इसके बाद इन सतहों पर बने बैक्टीरियल बायोफिल्म का मेटाजेनॉमिक्स विश्लेषण किया गया, जिससे मौजूद बैक्टीरिया और उनके एएमआर जीन की पहचान संभव हुई।

अध्ययन के परिणाम चिंताजनक हैं, क्योंकि सभी प्रकार के प्लास्टिक सतहों पर रोगजनक और एएमआर बैक्टीरिया पाए गए। पॉलिस्टिरिन और नर्डल्स पर सबसे अधिक एएमआर जीन मिले। माइक्रोप्लास्टिक पर 100 से ज्यादा अनोखे एएमआर जीन पहचाने गए जो लकड़ी और कांच जैसी प्राकृतिक व निष्क्रिय सतहों से कहीं अधिक थे।
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स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी  
एनवायरमेंट इंटरनेशनल में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक बायोफिल्म में मौजूद एएमआर बैक्टीरिया मल, सीवेज और किनारों से समुद्री पारिस्थितिकी में लंबी दूरी तक पहुंच सकते हैं। बायोफिल्म उन्हें एंटीबायोटिक और प्रतिकूल वातावरण से सुरक्षित रखता है। ऐसे में माइक्रोप्लास्टिक सुपर-कैरियर बनकर रोगजनक जीवाणुओं को नई जगहों तक पहुंचाते हैं। अध्ययन में कहा गया है कि माइक्रोप्लास्टिक केवल पर्यावरणीय खतरा नहीं बल्कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध के वैश्विक संकट को बढ़ाने वाला तत्व भी बन रहा है। यह समस्या केवल प्रदूषण नहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी मुद्दा है।

कड़े वेस्ट मैनेजमेंट की जरूरत
शोधकर्ताओं ने इस संकट से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाने की सलाह दी है। इससे निपटने के लिए कड़े वेस्ट मैनेजमेंट और सीवेज मॉनिटरिंग करने के साथ उच्च जोखिम वाले प्लास्टिक पर कड़ी निगरानी और सुरक्षित विकल्पों का विकास करने की जरूरत है। इसके अलावा तटीय सफाई अभियान और माइक्रोप्लास्टिक, एक्वाकल्चर और खाद्य सुरक्षा पर दीर्घकालिक अनुसंधान भी विशेष रूप से आवश्यक है।

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