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गुजरात चुनाव: भाजपा को उम्मीद, रास आएगा शाह का राज्यसभा दांव 

Wed, 29 Nov 2017 02:47 PM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली
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गुजरात में अपनी प्रयोगशाला बचाने को लेकर जद्दोजहद में फंसी भाजपा को अब अमित शाह के राज्यसभा चुनाव के दांव से उम्मीदें हैं। पार्टी को लगता है कि राज्यसभा में शाह के जरिए चला गया दांव अब विधानसभा चुनावों में रास आएगा। 
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रमुख सिपहसलार अहमद पटेल को पटकनी देने की कोशिश में शाह ने शंकर सिंह वाघेला के जरिए कांग्रेस के 14 विधायकों को तोड़ा था। इसमें वाघेला को छोड़ अधिकांश विधायक भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। पार्टी को उम्मीद है कि कांग्रेस के ये स्थापित चेहरे मुश्किल वक्त में भाजपा के मददगार साबित होंगे, क्योंकि इनमें से अधिकांश ऐसे चेहरे हैं जिनकी क्षेत्र में अपनी पहचान है। वे कांग्रेस की वजह से नहीं बल्कि अपनी पहचान की वजह से विधानसभा का चुनाव लगातार जीतते आ रहे हैं, इसलिए ये चेहरे इस दफे भाजपा की सीटें बढ़ाने में मददगार साबित होंगे।
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शाह ने अकेले ही लिया था कांग्रेस को तोड़ने का फैसला

- फोटो : amar ujala
सूत्र बताते हैं कि चंद माह पूर्व हुए राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल को चुनौती देने का फैसला अकेले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का था। तब पीएम नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें विधायकों के तोड़फोड़ की मनाही की थी, मगर धुन के पक्के शाह ने अपने रिस्क पर कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर अहमद पटेल को चुनौती पेश की थी। तब अहमद की जीत के बाद शाह की रणनीति पर सवाल भी उठे थे, लेकिन शाह का तब का फैसला आज भाजपा को लाभ का सौदा नजर आ रहा है। पार्टी के एक शीर्ष नेता के अनुसार कांग्रेस से बगावत कर आए जिन नेताओं को उम्मीदवार बनाया गया है, उनमें से अधिकांश अपने दम पर चुनाव जीतने वाले हैं। उनके आने से उन क्षेत्रों में अब भाजपा को जीत मिलेगी। दरअसल यूपी के चुनाव में भी शाह ने जातीय गणित को साधने के अलावा सपा और बसपा के कद्दावर नेताओं को भाजपा में शामिल कर उन्हें उम्मीदवार बनाया था। अब गुजरात में भी शाह ने यही रणनीति अपनाई है। यहां जातीय समीकरण के साथ उन्होंने दमदार चेहरों को मैदान में उतारा है।

शाह की सोशल इंजीनियरिंग

- फोटो : reuters
सोशल इंजीनियरिंग के तहत भाजपा ने गुजरात में पिछड़ों और पटेलों पर दांव लगाया है। पिछड़ा वर्ग के करीब 61 नेताओं और पाटीदार समाज के 52 नेताओं को टिकट दिया गया है। वर्तमान में पाटीदार समाज से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के विधायकों की संख्या 42 है। इसके अलावा राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री समेत पाटीदार समाज के 8 मंत्री हैं। पाटीदारों के अलावा भाजपा ने 28 अनुसूचित जनजाति, 12 अनुसूचित जाति, 13 क्षत्रिय और 9 ब्राह्मणों को उम्मीदवार बनाया है।
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आंकड़े कहते हैं, मजबूत है भाजपा की जमीन

- फोटो : FILE PHOTO
गुजरात को हिंदुत्व की प्रयोगशाला यूं ही नहीं माना जाता है। यहां जमीन पर पार्टी बेहद मजबूत मानी जाती है। सूबे में विधानसभा की 40 सीटें ऐसी हैं, जहां वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों की जीत 30 हजार से ज्यादा मतों से रही थी। इन सीटों पर भाजपा को हराना इतना आसान नहीं है, जबकि ऐसी श्रेणी में कांग्रेस के सीटों की संख्या महज 10 है। अगर 25 हजार के ऊपर से जीत वाली सीटों के आंकड़े देखें तो भाजपा के खाते में ऐसी सीटों की संख्या करीब 55 हो जाती है। ऊपर से पार्टी ने कांग्रेस के दमदार चेहरों को अपने पाले में लाकर मैदान में उतार दिया है। अगर आंकड़ों को देखा जाए तो भाजपा को हराना आसान नहीं है। 
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