केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु के चेन्नई शहर की पेयजल आपूर्ति को पूरा करने के लिए 380 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए पांचवें जलाशय को शहर को समर्पित किया और राज्यभर में 67,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
बता दें कि शाह यहां दो दिन के दौरे पर आए हुए हैं। शाह की यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि राज्य में अगले साल मई में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वैसे शाह जब भी किसी राज्य में जाते हैं तो वहां की राजनीति में हलचल मच जाती है।
शाह ने जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी उनमें 61,843 करोड़ रुपये की लागत वाले चेन्नई मेट्रो रेल का दूसरा चरण, कोयम्बटूर में एलिवेटेड राजमार्ग जिसकी अनुमानित लागत 1,620 करोड़ रुपये है, करूर जिले में कावेरी नदी के पार एक बैराज और यहां 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की आईओसीएल की परियोजनाएं शामिल हैं।
शाह ने तिरुवल्लूर जिले में थेरवईकांडिगाइ जलाशय को समर्पित किया और यहां कालीवनार आरंगम से इन परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस मौके पर मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी और उपमुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम भी मौजूद थे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को दो दिन के दौरे पर दक्षिणी राज्य तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई पहुंचे थे। शाह यहां तमिलनाडु भाजपा इकाई के प्रतिनिधियों और सहयोगी एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे।
एम अलगिरि से करेंगे मुलाकात
अमित शाह अपने चेन्नई दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के बेटे और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के बड़े भाई एम अलगिरि से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा अलगिरि की संभावित पार्टी केडीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है। अलगिरि की बात करें तो वे डीएमके में काफी उपेक्षित रहे हैं।
अलगिरि के करीबी भाजपा में शामिल
अलगिरि के करीबी केपी रामलिंगम शनिवार को भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा, 'एमके अलगिरी (डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के भाई) के साथ मेरे करीबी संबंध हैं। मैं उन्हें भारतीय जनता पार्टी में लाने की कोशिश करूंगा।' बता दें कि रामलिंगम डीएमके के निलंबित नेता हैं। वे संसद के पूर्व सदस्य भी रह चुके हैं।
एआईएडीएमके से तल्खी
राज्य की सत्तारूढ़ एआईएडीएमके पार्टी के साथ भाजपा का गठबंधन है। हाल के दिनों में दोनों पार्टियों के बीच तल्खी बढ़ती दिखाई दी है। जयललिता के निधन के बाद पार्टी के करीबी कई उद्योगपतियों के यहां छापेमारी और बागी नेता ओ पनीरसेल्वम के विद्रोह और पार्टी के विभाजन में भाजपा का हाथ माना जाता है। कहा जाता है कि एआईएडीएमके के शीर्ष नेतृत्व के पास भाजपा की ऐसी आक्रामक सियासी नीतियों से निपटने में दक्षता नहीं थी।