2002 के नरोदा गांव नरसंहार मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने बुधवार को पूर्व भाजपा विधायक माया कोडनानी के उस आवेदन को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह व 13 अन्य को बतौर बचाव पक्ष का गवाह बुलाने का अनुरोध किया है। कोडनानी यह साबित करना चाहती हैं कि घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थीं।
जस्टिस पीबी देसाई ने कहा कि गवाहों को पेश होने के लिए ‘मुकदमे के उचित और प्रासंगिक चरण’ में समन किए जाएंगे। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ‘यदि कुछ गवाहों की गवाही के दोहराए जाने की संभावना होगी तो बाद के चरण में उन्हें नहीं बुलाने का भी विकल्प है लेकिन (अभियोजन पक्ष द्वारा) कोई आपत्ति नहीं जताए जाने पर और बचाव पक्ष के गवाहों से पूछताछ करने के आरोपी के अधिकारी को पहचानते हुए, मेरा मानना है कि गवाहों की इस संख्या से पूछताछ किया जाना न तो अनुचित है और न ही असंगत।’
नरोदा पाटिया दंगा मामले में कोडनानी को 28 साल कारावास की सजा सुनाई गई है और वह अभी जमानत पर रिहा है। इससे पहले, नरोदा गांव मामले में उन्होंने विशेष अदालत में गुहार लगाई थी कि अमित शाह समेत 14 लोगों से बतौर बचाव पक्ष के गवाह बुलाया जाए। वह यह साबित करना चाहती हैं कि 28 फरवरी, 2002 को हुई घटना के समय वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थी। यह मामला गोधरा ट्रेन मामले के एक दिन बाद का है। इसके बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे थे।