केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने विश्वास जताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) चालू वित्त वर्ष यानी 2023-24 में 50,000 करोड़ रुपये का वित्तीय वितरण लक्ष्य हासिल कर लेगा। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की कार्यान्वयन एजेंसी एनसीडीसी ने 2022-23 में 41,000 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की थी।
एनसीडीसी की 89वीं महापरिषद की बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि निगम ने पिछले नौ सालों में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। एनसीडीसी चालू वित्त वर्ष में वित्तीय सहायता के वितरण में 2013-14 के 5,300 करोड़ रुपये के 10 गुना वृद्धि हासिल करने की तरफ अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि 2022-23 के दौरान 99 फीसदी कर्ज वसूली के साथ निगम का शुद्ध एनपीए शून्य पर बना हुआ है।
केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि एनसीडीसी को प्रत्येक तिमाही के लक्ष्यों के साथ-साथ अगले 3 वर्षों में एक लाख करोड़ रुपये का वार्षिक वितरण लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उसे कम दरों पर कर्ज लेने के जरिये ढूंढने चाहिएं और ब्याज दर कम रखते हुए सहकारिता क्षेत्र को ऋण देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनसीडीसी का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं बल्कि सहकारिता क्षेत्र के समग्र विकास का होना चाहिए। शाह ने कहा कि देश के 60 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके पास पूंजी नहीं है। इनको आर्थिक समृद्धि के मार्ग पर साथ लाने का एकमात्र रास्ता सहकारिता है। इसके लिए आवश्यक है कि सहकारी समितियों की हिस्सेदारी जीडीपी में बढ़ाई जाए, साथ ही समितियों के कंप्यूटरीकरण के साथ-साथ काम करने की दिशा में भी सार्थक लचीलापन उपलब्ध कराया जाए।
पैक्स के काम का दायरा बढ़ा
शाह ने कहा कि कंप्यूटरीकरण के बाद प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) का दायरा बढ़ गया है। अब वह डेयरी, भंडार गृहों की स्थापना, एलपीजी, पेट्रोल, हरित ऊर्जा वितरण एजेंसी के रूप में काम कर रहा है। इसके अलावा बैंकिंग संवाददाता सामान्य सेवा केंद्र के रूप में 300 से अधिक सेवाएं प्रदान कर रहा है। इसमें सहकारी समितियां का डाटा बैंक तैयार करने जैसी 30 से व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं। इससे न केवल पैक्स की आर्थिक समृद्धि हो रही है, बल्कि किसानों को अपनी आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जन औषधि केंद्र, किसान समृद्धि केंद्र समेत गांवों की तमाम समितियों को भी पैक्स द्वारा संचालित किया जा रहा है।
देश में 8.9 लाख सहकारी समितियां
शान कहा कि देश में 8.9 लाख सहकारी समितियां हैं और 29 करोड़ किसान इसके सदस्य हैं। 1963 में अपनी स्थापना के बाद से एनसीडीसी ने कृषि और बागवानी सहकारी समितियां सहित सहकारी समितियां को अब तक 2,78,378 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस विकसित किया गया है। इसमें राज्य सरकारों की सहायता से देश भर के 8 लाख से अधिक सहकारी समितियां का व्यापक प्रामाणिक और अपडेट डाटा उपलब्ध है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि देश में अलग-अलग उपनियम वाले पैक्स के कामकाज में एकरूपता लाने पर कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने सहकारिता मंत्रालय की ओर से तैयार पैक्स मॉडल उपनियमों को अपना लिया है।
60 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके पास पूंजी नहीं
शाह ने कहा कि देश के 60 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके पास पूंजी नहीं है। इनको आर्थिक समृद्धि के मार्ग पर साथ लाने का एकमात्र रास्ता सहकारिता है। इसके लिए आवश्यक है कि सहकारी समितियों की हिस्सेदारी जीडीपी में बढ़ाई जाए, साथ ही समितियों के कंप्यूटरीकरण के साथ-साथ काम करने की दिशा में भी सार्थक लचीलापन उपलब्ध कराया जाए।