भाजपा ने अपना नया कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया है। 10-12 दावेदारों को पछाड़ते हुए युवा नितिन नबीन इस पद पर विराजमान हुए हैं। इसमें दो नेता ऐसे भी थे जो प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को भी प्रिय थे। माना जा रहा था कि इनमें से कोई एक चेहरा भाजपा की कमान संभाल सकता है, लेकिन लॉटरी लगी नितिन नबीन की। इसके बाद नितिन नबीन को सूचना देने से लेकर शेष जिम्मेदारी अमित शाह ने निभाई।
नितिन नबीन दिल्ली आए तो उनके स्वागत में भाजपा मुख्यालय पर फ्रंट लाइन के नेता खड़े थे। सबके चेहरे के हाव-भाव अलग संदेश दे रहे थे। अमित शाह को इसे भांपते देर न लगी। लिहाजा मंगलवार को गृहमंत्री ने संसद भवन के अपने दफ्तर में खबरचियों से संवाद किया। पूरे संवाद का लव्बोलुआब यही था कि सब ‘अपने कंट्रोल’में है।
इस उम्र में कितना बोझ उठवाओगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 83 के हो चुके हैं। भोजन के शौकीन हैं। ऊपर से हर बात पर राहुल गांधी से चर्चा जरूरी है। पार्टी के ही एक बड़े नेता कहते हैं कि अभी तक हमारे अध्यक्ष की एक प्रॉपर टीम भी नहीं बन पाई। उनके पास सचिन पायलट मिलने आए, बिना समाधान के लौट गए। खैर, सचिन को तो लौटना ही था, क्योंकि उनके पास राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की शिकायत के सिवा कुछ खास नहीं होता। अशोक गहलोत से खरगे की अच्छी निभती है। इसी तरह कई राज्यों के नेता समय लेकर आते हैं, लेकिन जैसे आते हैं, उसी तरह से लौट जाते हैं। अपने गृहराज्य कर्नाटक में भी उनकी आधी-अधूरी चलती है। ऊपर से एक के बाद एक राज्य के महत्वपूर्ण चुनाव आ रहे हैं। बताते हैं कि अभी संसद भवन में मजाकिया लहजे में खरगे ने अपने एक सहयोगी से कह दिया कि आखिर इस उम्र में कितना बोझ उठवाओगे?
ठंडी खीर खाना चाहता है कांग्रेस आलाकमान
कर्नाटक में एक बड़ा मुद्दा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कब तक अपने पद पर रहेंगे? रणदीप सुरजेवाला कहते हैं कि इस बारे में आप लोगों की भविष्यवाणी फेल हो गई। सिद्धारमैया अभी अपने पद पर हैं। आगे ‘गेस’कीजिए। वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ऐसे सवाल का कोई उत्तर नहीं देना चाहते। खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बता दिया कि जब तक कांग्रेस हाई कमान चाहेगा, तब तक वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहेंगे। सिद्धारमैया ने आगे कहा कि कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को पांच साल शासन करने के लिए जनादेश दिया है। दरअसल यह मामला ठंडा पड़ गया था, लेकिन रामनगरा से कांग्रेस विधायक एचएस इकबाल हुसैन ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि 06 जनवरी को डीके शिवकुमार राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे। दरअसल, कांग्रेस हाईकमान कर्नाटक में ठंडी खीर खाना चाहता है। वह चाहता है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच में शांति से सब ठीक हो जाए। क्योंकि सिद्धारमैया ओबीसी के बड़े नेता हैं। कर्नाटक में उनका जनाधार और साफ-सुथरी छवि है। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं।
उत्तर प्रदेश में क्या होने वाला है?
पंकज चौधरी के हाथ में प्रदेश की कमान आने से भाजपा की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विरोधी लॉबी काफी खुश है। तर्क दिया जा रहा है कि अब कुर्मी, कोईरी, कुशवाहा, मौर्या समेत अन्य पिछड़ा वर्ग में पार्टी का जनाधार बढ़ जाएगा। अब यही लॉबी बताने में जुटी है कि राज्य में जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है। राज्य में अगड़ा-पिछड़ा सब बैलेंस होगा। हालांकि दिल्ली वाले जान रहे हैं कि अभी उत्तर प्रदेश की राह में बड़े कांटे हैं।
हेमंत सोरेन के संपर्क में राहुल गांधी
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता विपक्ष राहुल गांधी एक दूसरे के संपर्क में हैं। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने, जेल जाने और फिर मुख्यमंत्री बनने के सफर तक राहुल गांधी ने हेमंत का हौसला बढ़ाया था। बिहार चुनाव के दौरान पैदा हुई परिस्थितियों ने हेमंत को काफी खिन्न कर दिया था। बताते हैं कि भनक पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को लगी। इसके बाद राहुल गांधी सक्रिय हो गए। राहुल इस समय एक प्रयास और कर रहे हैं। वह इंडिया गठबंधन के सहयोगियों का दयरा बढ़ाने में लगे हैं। ताकि आगामी राज्यों के चुनाव में भाजपा की चुनौती से निपटा जा सके।
कितनी बड़ी रेखा खींच पाएंगी रेखा
रेखा के मंत्रिमंडल में शांमिल चेहरों में इसका उत्तर तलाशने पर कई रंग देखने को मिलते हैं। कोई दबी जुबान से रेखा के प्रशासनिक कामकाज के अनुभव पर ही सवाल उठा देता है। दूसरी तरफ रेखा हैं कि लगातार बड़ी रेखा खींचने में व्यस्त हैं। हां, दिल्ली में प्रदूषण और खराब वायु गुणवत्ता ने मुख्यमंत्री को तंग कर रखा है। अभी एक कार्यक्रम में उन्हें हूटिंग का भी सामना करना पड़ा। जहां बड़ी संख्या में लोग एक्यूआई, एक्यूआई का नारा लगाने लगे। आम आदमी पार्टी ने भी इसे भुनाने में जरा देर नहीं लगाई। उसके कार्यकर्ताओं ने इसे तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल कराया। खबर यह भी है कि दिल्ली भाजपा के एक बड़े नेता के करीबी ने भी इसमें जोरदार दिलचस्पी दिखाई।
शीतकालीन सत्र से विपक्ष खुश
बिहार चुनाव के नतीजे ने जितना विपक्ष को निराश किया, लोकसभा के शीतकालीन सत्र से वह उतना ही खुश है। टीएमसी की एक राज्यसभा सदस्य कहती हैं कि विपक्ष ने सत्ता पक्ष को ‘धो’डाला। कांग्रेस की सांसद रेणुका चौधरी सत्ता पक्ष की चुटकी लेने से जरा भी पीछे नहीं रहतीं। विपक्ष के सांसदों को सबसे अच्छा पल केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राहुल गांधी के बीच में हुई भिडंत का लगता है। जहां राहुल गांधी ने सीधे खड़े होकर अमित शाह को एसआईआर के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दे दी।